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सुल्तानपुर में UPPCL के तहत फरीदपुर पावर हाउस के जेई का अचानक तबादला कर टीजी-2 को चार्ज दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। ट्रांसफर नीति, सेवा नियमावली और पदक्रम की अनदेखी के आरोप लगे हैं, जांच की मांग तेज।
ट्रांसफर विवाद से गरमाया सुल्तानपुर (Img- Internet)
Sultanpur: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अधीन संचालित बिजली विभाग में हालिया तबादला सूची को लेकर विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि फरीदपुर पावर हाउस में तैनात एक अवर अभियंता (JE) का अचानक कादीपुर स्थानांतरण कर दिया गया, जबकि उनकी जगह दरियापुर के प्रभारी राजाराम वर्मा (टीजी-2) को कार्यभार सौंप दिया गया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय सेवा नियमावली और पदक्रम (Hierarchy) के विपरीत है। अवर अभियंता (JE) तकनीकी रूप से टीजी-2 से वरिष्ठ श्रेणी का पद होता है। ऐसे में कनिष्ठ श्रेणी के कर्मचारी को प्रभारी बनाना सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाता।
एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यदि इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जाती है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है। उनका दावा है कि पूर्व में उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि JE के स्थान पर टीजी-2 को प्रभारी न बनाया जाए।
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UPPCL की सेवा नियमावली और कार्मिक विनियमों के अनुसार
सूत्रों का आरोप है कि जारी आदेश में विशेष प्रशासनिक कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
UPPCL में मनमानी? (Img- Internet)
राज्य सरकार की वार्षिक स्थानांतरण नीति के अनुसार सामान्यतः तबादले मई–जून में किए जाते हैं। एक ही वित्तीय वर्ष में बार-बार तबादले से बचने और बिना स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के आकस्मिक स्थानांतरण न करने के निर्देश हैं।
बताया जा रहा है कि संबंधित जेई के खिलाफ कोई लिखित शिकायत या अनुशासनात्मक जांच लंबित नहीं थी। ऐसे में अचानक तबादला और कनिष्ठ कर्मचारी को चार्ज देने से कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ा है।
जारी आदेश में कहा गया है कि
1. आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
2. संबंधित अधिकारी तुरंत कार्यभार ग्रहण करेंगे।
3. किसी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।
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हालांकि प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी किए जाने का उल्लेख है, लेकिन नीति अनुपालन और वैधानिकता को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मामला सार्वजनिक होने के बाद विभागीय जांच की मांग उठने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शासनादेश, सेवा नियमावली और पदक्रम की अनदेखी हुई है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
यह विवाद केवल एक तबादले का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्मिक प्रबंधन का मुद्दा बन गया है। यदि नियमों की अनदेखी सिद्ध होती है, तो इसका असर कर्मचारियों के मनोबल और विभाग की साख पर पड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च स्तर से इस प्रकरण पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या औपचारिक जांच बैठाई जाती है।