साइबर अपराध पर सख्ती, यूपी में तैयार होगी ‘साइबर सिंघम’ फोर्स

साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए यूपी सरकार ने ‘साइबर सिंघम’ प्लान शुरू किया है। इसके तहत 75 जिलों में फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं, जो वैज्ञानिक जांच और डिजिटल सबूतों के जरिए अपराधियों तक तेजी से पहुंचेंगे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 18 April 2026, 2:06 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। साइबर दुनिया में छिपकर वार करने वाले अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने बड़ा दांव खेला है। ‘साइबर सिंघम’ के नाम से शुरू हुई इस नई पहल के तहत पुलिस अब सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर नहीं, बल्कि हाईटेक और वैज्ञानिक जांच के सहारे अपराधियों तक पहुंचेगी। साफ है कि आने वाले समय में अपराध और पुलिस के बीच की लड़ाई पूरी तरह टेक्नोलॉजी बेस्ड होने वाली है।

हर जिले में तैयार होगी ‘साइबर सिंघम’ टीम

प्रदेश के सभी 75 जिलों में फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस में पांच चरणों में 500 विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक करीब 300 एक्सपर्ट तैयार हो चुके हैं, जबकि बाकी बैचों का प्रशिक्षण जल्द पूरा किया जाएगा।

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प्रशिक्षण में मिल रही हाईटेक स्किल्स

ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग और फोरेंसिक एनालिसिस जैसी आधुनिक तकनीकों की गहन जानकारी दी जा रही है। इससे घटनास्थल पर सबूतों को सुरक्षित रखने और अपराध की सटीक जांच करने में मदद मिलेगी। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के मुताबिक, इस पहल से प्रदेश की कानून-व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा।

क्या है ‘साइबर सिंघम’ प्लान

इस योजना के तहत हर जिले में प्रशिक्षित फोरेंसिक टीम तैनात होगी, जो क्राइम सीन पर पहुंचते ही वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू करेगी। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और साइबर अपराधों की तेजी से ट्रैकिंग इस प्लान का अहम हिस्सा है।

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पुलिसिंग में दिखेगा बड़ा बदलाव

‘साइबर सिंघम’ पहल के लागू होने के बाद पुलिसिंग का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। जांच पहले से ज्यादा सटीक और पारदर्शी होगी, जिससे अपराधियों की पहचान जल्दी हो सकेगी।

Location :  Lucknow

Published :  18 April 2026, 2:06 PM IST

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