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सोनभद्र में बिजली कर्मचारियों ने 12 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है। बीजपुर, नधिरा और बभनी के उपकेंद्रों पर कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। वेतन विसंगति, न्यूनतम वेतन और संविदा कर्मियों के अधिकारों को लेकर नाराज कर्मचारी सरकार से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध
Sonbhadra: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बिजली कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ (एटक) के आह्वान पर बीजपुर, नधिरा और बभनी क्षेत्र के 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों पर तैनात संविदा और नियमित कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है।
आंदोलन के पहले चरण में बुधवार को कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इस दौरान कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए जोरदार नारेबाजी भी की और अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि अब वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर विभाग और शासन स्तर पर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी 12 सूत्रीय मांगों में कई अहम मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारियों ने प्रमुख रूप से वेतन विसंगति को दूर करने, संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम में शामिल करने, न्यूनतम वेतन 28,000 रुपये तय करने और कार्य के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपये की सहायता देने की मांग उठाई है।
उनका कहना है कि संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब वे आंदोलन के रास्ते पर उतरने को मजबूर हुए हैं।
कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा और आने वाले दिनों में कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान गिरेंद्र कुमार यादव, तसव्वर अंसारी, रहमत अली, जितेंद्र कुमार, कमलेश कुमार, बाबूलाल, सोनू यादव, गुलाबचंद यादव, संदीप, विकेश और छोटेलाल समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने "मजदूरों को न्याय दो" और "प्रदेश को बिजली दो" जैसे नारे लगाकर अपनी एकता और संघर्ष का प्रदर्शन किया।
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यह आंदोलन आने वाले समय में और तेज हो सकता है, जिससे बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और इस विवाद का समाधान कब तक निकलता है।