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सोनभद्र के जुगैल क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर दिखा। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, मोबाइल नेटवर्क और बस सेवा की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
सोनभद्र में सड़कों पर फूट पड़ा लोगों का आक्रोश
Sonbhadra: जनपद सोनभद्र के जुगैल क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही उपेक्षा के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। सड़क, बिजली, पीने का पानी, स्वास्थ्य सुविधा, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी बस सेवा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे जुगैल क्षेत्र के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
जुगैल क्षेत्र उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री संजय गौड़ के विधानसभा क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद यहां की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। वर्ष 1989 में सोनभद्र जिले के गठन के समय जुगैल क्षेत्र को विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी वे सपने अधूरे ही हैं।
यह जिला देश के सबसे बड़े, पिछड़े, आदिवासी और वनवासी बहुल जिलों में शामिल है, जो राज्य को भारी राजस्व भी देता है। बावजूद इसके, जुगैल क्षेत्र की स्थिति आज भी ‘काला पानी’ जैसी बनी हुई है।
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जुगैल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए मुख्यालय होते हुए वाराणसी जाना पड़ता है। कई बार समय पर उपचार न मिलने से मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती है।
मोबाइल नेटवर्क के अभाव में 101, 102, 108, 112 जैसे आपातकालीन टोल-फ्री नंबर भी यहां बेकार साबित हो रहे हैं, जिससे आपात स्थिति में लोगों की जान पर बन आती है।
मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जुगैल के गरीब और आदिवासी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। नेटवर्क न होने से बैंकिंग सेवाएं भी ठप हैं। ग्रामीणों को बैंक संबंधी कार्यों के लिए 30 किलोमीटर दूर ओबरा या चोपन जाना पड़ता है।
सोनभद्र जिले में हिंडाल्को, एनटीपीसी और यूपीपीसीएल जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाएं संचालित हैं, लेकिन इनका लाभ स्थानीय आदिवासी और गरीब जनता को नहीं मिल पा रहा है। रोजगार में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय युवाओं में भारी असंतोष है। साथ ही औद्योगिक प्रदूषण से नदियां और पर्यावरण भी प्रभावित हो रहे हैं।
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जुगैल क्षेत्र में जिरही देवी, बंसरा देवी, सोभनाथ मंदिर, अगोरी किला, कुंडवासिनी धाम और सोन-रेणुका-बिजुल नदियों का संगम जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थल मौजूद हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के विकास को लेकर कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई गई है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि जुगैल क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक समग्र विकास योजना बनाई जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को सम्मानजनक जीवन मिल सके।