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सड़े पानी से बढ़ी बीमारी की आशंका (Img: Dynamite News)
Sitapur: सीतापुर नगर में लगातार गिरते भूजल स्तर और दूषित पानी की समस्या को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। नगरवासियों का कहना है कि कभी शहर के जलस्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सरायन नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है। नदी में पानी का प्रवाह बंद होने से गंदा और सड़ा पानी जमा है। इससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध के साथ ही जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता हिमांशू सिंह से खास बातचीत में नगरवासियों ने बताया कि सराय नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने की व्यवस्था होने पर भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद मिल सकती है। वर्तमान में बारिश ही जलस्तर बढ़ने का प्रमुख प्राकृतिक माध्यम है। बारिश कम होने से भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। वहीं, नगर के कई इलाकों में पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पानी का टीडीएस 1000 से अधिक पहुंच गया है। ऐसे पानी को पीने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
दूषित पानी की समस्या का सबसे अधिक असर गरीब और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार आरओ जैसे शुद्धीकरण उपकरण लगाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरी में स्थानीय जलस्रोतों के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता का समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं।
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सर्किट हाउस में गुरुवार को जिले के प्रभारी मंत्री पवन पांडेय के सामने नगर की जल समस्या का मुद्दा उठाया गया। उस समय जिलाध्यक्ष, कई विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष सहित जिलाधिकारी भी मौजूद थे। नगरवासियों की समस्या सुनने के बाद प्रभारी मंत्री ने प्रशासन के साथ बैठक कर समस्या के समाधान की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सरायन नदी में पानी का प्रवाह बंद होने से जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले नदी में विभिन्न प्रकार के जलीय जीव पाए जाते थे। अब पानी के दूषित और सड़ने के कारण इनके जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। लोगों ने इसे पर्यावरण से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए नदी के पुनर्जीवन की मांग की है।
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नगरवासियों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सरायन नदी को लेकर ठोस पहल की मांग की है। उनका कहना है कि सराय को अभिलेखों में पुनः नदी का दर्जा दिलाया जाए और उसमें पानी छोड़े जाने की स्थायी व्यवस्था की जाए। इससे नदी का पुनर्जीवन होने के साथ शहर के भूजल स्तर को बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
लोगों का कहना है कि सराय नदी का पुनर्जीवन केवल जल संकट का समाधान नहीं, बल्कि सीतापुर के पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। प्रशासन को इस दिशा में तत्काल सर्वे कराकर पानी की गुणवत्ता की जांच और नदी के पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।
Location : Sitapur
Published : 16 August 2026, 5:29 PM IST