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नाबालिग पर जानलेवा हमले के केस में बड़ा मोड़ (IMG: Dynamite News)
Gorakhpur: गोरखपुर गोला थाना क्षेत्र के फत्तेपुर गांव में नाबालिग किशोर पर हुए कथित जानलेवा हमले का मामला अब एक नए विवाद में फंस गया है। जिस मामले में किशोर गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके इलाज के लिए परिवार को गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक दौड़ना पड़ा, अब उसी केस की चार्जशीट को लेकर पुलिस महकमे में सवाल खड़े हो गए हैं। घायल किशोर की मां ने आरोप लगाया है कि चार्जशीट से दो आरोपितों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, इसके लिए किशोर को दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता पानमती पत्नी धर्मेंद्र के मुताबिक, घटना बीते 13 जून की है। उनका नाबालिग बेटा रितेश यादव गांव के चौराहे पर था। आरोप है कि इसी दौरान गुड्डी देवी, उसके बेटे आर्यन यादव और आदित्य यादव, धीरज यादव, शुभम यादव, रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव और कौशल यादव ने उस पर हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि हमले में लोहे की पाइप, रॉड और लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया गया। मारपीट में रितेश के जबड़े में गंभीर चोट आई, जबकि सिर पर भी चोट लगी और उसे टांके लगाने पड़े।
परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। घायल किशोर की हालत और चोट की गंभीरता को देखते हुए बाद में धारा 109 बीएनएस की बढ़ोतरी भी की गई। मामले में आरोपित धीरज यादव और कौशल यादव की जमानत भी जिला एवं सत्र न्यायालय गोरखपुर से 2 जुलाई को खारिज हो चुकी है। इसके बाद पुलिस की विवेचना आगे बढ़ती रही।
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शिकायत के अनुसार, विवेचक ने 31 जुलाई को घायल रितेश का उसके घर पहुंचकर बयान दर्ज किया था। परिवार का कहना है कि बयान दर्ज होने के बाद विवेचना पूरी की गई और चार्जशीट क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय भेजी गई। यहीं से मामले में नया विवाद खड़ा हो गया। घायल किशोर की मां पानमती ने आरोप लगाया कि चार्जशीट से शुभम यादव और रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव के नाम हटाने के लिए रितेश से दोबारा बयान कराने की कोशिश की जा रही है।
पानमती ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को दी शिकायत में क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय के पेशकार दिनेश सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पेशकार की ओर से घायल किशोर को दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुलाया जा रहा है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामले की जानकारी क्षेत्राधिकारी को नहीं देने की बात कही जा रही है।
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पानमती ने अपनी शिकायत में आरोपित पक्ष पर धमकी देने के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिवार पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है और समझौता नहीं करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने अपने दोनों बेटों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
पानमती ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उनके बेटे पर हमला हुआ, उसके बाद मामले की विवेचना बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। उन्होंने सभी आरोपितों के नाम निष्पक्ष तरीके से न्यायालय के सामने भेजने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग भी की है।
Location : Gorakhpur
Published : 16 August 2026, 5:03 PM IST