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रायबरेली के परशदेपुर–हाजीपुर मार्ग पर हाल ही में बनी सड़क मात्र पांच दिनों में क्षतिग्रस्त हो गई। गिट्टी उखड़ने से सड़क पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच, मरम्मत और ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है।
रायबरेली में नई सड़क का बुरा हाल
Raebareli: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। परशदेपुर-हाजीपुर मार्ग पर उढरियापुर से प्रतापगढ़ बॉर्डर तक हाल ही में बनी सड़क महज पांच दिनों में ही क्षतिग्रस्त हो गई। सड़क की सतह से गिट्टी उखड़ जाने के कारण जगह-जगह फिसलन पैदा हो गई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क पर गिट्टी फैल जाने से दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसलकर गिर रहे हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह मार्ग अत्यंत व्यस्त माना जाता है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण, स्कूली बच्चे और व्यापारी आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब हालत किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
ग्रामीण आकाश ने बताया कि सड़क निर्माण को अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ और उसकी हालत बदहाल हो गई है। उनका कहना है कि यह साफ तौर पर मानकों की अनदेखी और लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, एक अन्य ग्रामीण मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि सड़क में घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग किया गया है। इतनी जल्दी गिट्टी का उखड़ जाना भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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सड़क निर्माण में लगे मजदूरों ने भी ठेकेदार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। मजदूरों के अनुसार, ठेकेदार के निर्देश पर केवल झाड़ू लगाकर उखड़ी गिट्टियों को हटाया जा रहा है, ताकि ऊपर से सड़क ठीक दिखाई दे। हालांकि सड़क की वास्तविक मरम्मत या पुनर्निर्माण की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
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ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सड़क की स्थायी मरम्मत की अपील की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन और प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक संज्ञान लेता है।