संत प्रेमानंद से मिलने की जिद: नेपाल बॉर्डर पार कर वृंदावन पहुँचे मासूम भाई-बहन, फुटपाथ पर गुजारी रात

संत प्रेमानंद के प्रवचनों से प्रभावित होकर नेपाल के दो नाबालिग भाई-बहन स्कूल जाने के बहाने घर से निकले और वृंदावन पहुँच गए। अनजान शहर में फुटपाथ पर रात बिताने वाले इन मासूमों को पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है, परिजनों से संपर्क हुआ है।

Updated : 27 July 2026, 2:07 PM IST
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 Vrindavan: आस्था और समर्पण की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन जब यह अतिरेक बन जाए तो बड़ी चिंता पैदा कर देती है। उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर वृंदावन में कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां संत प्रेमानंद के प्रवचनों से ऐसा गजब का प्रभाव पड़ा कि नेपाल से दो नाबालिग सगे भाई-बहन स्कूल जाने के बहाने घर से निकल पड़े और मीलों का सफर तय कर सीधे वृंदावन पहुंच गए। बिना किसी बड़े सहारे के दोनों बच्चों ने अपनी इस लंबी यात्रा के दौरान कई मुश्किलें झेलीं, यहाँ तक कि परिक्रमा मार्ग के एक फुटपाथ पर रात भी गुजारी।

स्कूल बैग में किताबें और ड्रेस रखकर निकले थे बच्चे

मामला नेपाल के जिला रुपनदेई का है। यहाँ एक किसान परिवार के दो बच्चे- 13 वर्षीय भाई (जो कक्षा छह में पढ़ता है) और उसकी सात वर्षीय बहन (जो एलकेजी की छात्रा है)- संत प्रेमानंद के मुग्ध करने वाले ऑनलाइन प्रवचन अपने पिता के मोबाइल फोन पर अक्सर सुना करते थे। संत के विचारों ने उनके कोमल मन पर ऐसा अमिट प्रभाव छोड़ा कि दोनों ने उनसे मिलने की पक्की ठान ली।

गत 24 जुलाई की सुबह दोनों बच्चों ने अपनी योजना को अमलीजामा पहनाया। वे रोजाना की तरह स्कूल जाने के लिए घर से निकले, लेकिन उनके स्कूली बैग में किताबों और कॉपियों के साथ स्कूल की ड्रेस भी रखी हुई थी। उनके पास यात्रा के लिए केवल सौ रुपये थे।

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नेपाल सीमा से गोरखपुर और फिर मथुरा के रास्ते पहुँचे वृंदावन

साहस और बाल-हक की यह दास्तान यहीं नहीं रुकती। बच्चों ने नेपाल सीमा को पार किया और उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा रेलवे स्टेशन पहुँचे। वहाँ से मात्र 35 रुपये का रेल टिकट लेकर वे गोरखपुर के लिए रवाना हुए।

गोरखपुर पहुँचने के बाद दोनों ने ट्रेन बदलकर मथुरा का सफर तय किया। मथुरा रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद उन्होंने कपड़े बदलकर अपनी स्कूल ड्रेस पहन ली और ई-रिक्शा पकड़कर शनिवार देर शाम वृंदावन की पावन भूमि पर जा पहुँचे।

फुटपाथ पर काटी रात, परिक्रमा मार्ग में तलाशते रहे आश्रम

वृंदावन पहुँचने के बाद अनजान शहर में इन दोनों मासूमों की रात काफी संघर्षपूर्ण रही। बच्चों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे रात के वक्त परिक्रमा मार्ग में भटकते रहे और लोगों से संत प्रेमानंद के आश्रम का पता पूछते रहे। उस रात परिक्रमा मार्ग स्थित एक आश्रम में बँट रहा प्रसाद (भोजन) खाकर उन्होंने अपनी भूख मिटाई और फिर मजबूरन सड़क के एक फुटपाथ पर ही रात बितानी पड़ी।

अगली सुबह जब वे संत प्रेमानंद के दर्शन के लिए दोबारा निकले, तो स्थानीय लोगों की नजर उन पर पड़ गई।

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अटल्ला चुंगी पर खुला राज, पुलिस ने परिजनों को दी सूचना

अटल्ला चुंगी चौराहे के पास जब लोगों ने दोनों भाई-बहनों से अकेले घूमने का कारण पूछा, तो उनकी पूरी कहानी सुनकर सब हैरान रह गए। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों बच्चों को सुरक्षित कोतवाली ले आई।

पुलिस की शुरुआती जाँच में उनके बैग से किताबें और कॉपियाँ बरामद हुईं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनके परिजनों की तलाश शुरू की और नेपाल में मौजूद उनके किसान पिता से फोन पर संपर्क साधा। सर्किल अधिकारी सदर वरुण मिश्रा ने इस बात की पुष्टि की है कि बच्चों के पिता से बातचीत हो चुकी है और सुरक्षा के मद्देनजर दोनों नाबालिगों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द कर दिया गया है। अब परिजनों के वृंदावन पहुँचने के बाद समिति के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही दोनों बच्चों को उनके हवाले किया जाएगा।

Location :  Vrindavan

Published :  27 July 2026, 2:04 PM IST

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