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मौत को मात देकर लौटा अयान (Img- X)
New Delhi: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में जब एक बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई, तो उसके नीचे दबे 20 साल के अयान के लिए हर एक सेकंड जिंदगी और मौत का अंतर तय कर रहा था। हादसे में इमारत का मलबा अयान पर आ गिरा, लेकिन कुदरत का करिश्मा और स्थानीय लोगों की तत्परता से अयान जिंदा बाहर निकल आए। हालांकि, मौत से आमना-सामना होने का वह खौफनाक मंजर आज भी अयान और उनके परिवार के जहन में इस कदर बैठा है कि उनकी आवाज तक कांप उठती है।
सत्य निकेतन की एक बिजली दुकान पर बीते एक साल से काम सीख रहे अयान उस रोज दोपहर दुकान के बाहर स्टूल पर बैठे थे। दोपहर के करीब एक बजे थे और अयान अपने घर जाने के लिए उठने ही वाले थे कि अचानक तेज धमाके के साथ पूरी इमारत ढह गई।
अयान को संभलने का एक सेकंड भी नहीं मिला और वे भारी-भरकम मलबे के नीचे दब गए। चारों तरफ घना अंधेरा था, धूल का गुबार था और सांस लेना मुश्किल हो रहा था। अयान के मुताबिक, उस वक्त ऐसा लगा जैसे जिंदगी खत्म हो गई है और अब वे अपने माता-पिता को कभी नहीं देख पाएंगे।
मलबे के भीतर घुटन और डर से अयान लगातार मदद के लिए चिल्ला रहे थे। इसी बीच बाहर मौजूद सौरव और उनके भाई ने हिम्मत दिखाई और मलबे के बीच से अयान को सुरक्षित बाहर निकाला।
अयान को तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अयान के पिता वकील बताते हैं कि उनका बेटा शारीरिक रूप से तो ठीक हो रहा है, लेकिन उस खौफनाक अनुभव ने उसे मानसिक रूप से गहरा झटका दिया है और वह अब भी अक्सर सहम जाता है।
हादसे के वक्त पास की लॉन्ड्री दुकान में मौजूद 59 वर्षीय गोरे लालजी ने उस भयानक मंजर को बयां करते हुए बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ दुकान में धूल भर गई। बाहर भागकर देखा तो सामने सिर्फ तबाही का मंजर था।
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मलबे के बीच से एक बच्चे की सिर्फ गर्दन दिखाई दे रही थी जो बिलख-बिलखकर बचाने की गुहार लगा रहा था। लोगों ने बिना वक्त गंवाए हाथों से ही मलबा हटाना शुरू कर दिया। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत और हिम्मत के आगे मौत को भी पीछे हटना पड़ता है।
Location : New Delhi
Published : 11 September 2026, 1:13 PM IST