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यह खबर कानपुर के एक भयानक गैंगरेप केस की है, जिसमें नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप किया गया। इस घटना में एक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का लापरवाही बरतने का आरोप है और फर्जी एफआईआर दर्ज करने का भी मामला सामने आया है।
इसी कार में हुआ था गैंगरेप
Kanpur: यह खबर कानपुर के दिल दहला देने वाले गैंगरेप मामले की है, जो न सिर्फ शहर में बल्कि पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है। इस खौफनाक घटना ने हर किसी को चौंका दिया है, खासकर जब पता चला कि इसमें पुलिस और पत्रकार भी शामिल हैं। मामला इतना गंभीर है कि प्रदेश के आला पुलिस अधिकारियों तक को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ है और कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा कितनी कमजोर है और प्रशासनिक व्यवस्था कितनी लचर। चलिए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
घटना का शुरुआती क्राइम टोन
सोमवार रात की बात है, जब शहर की शांत रात में एक 14 साल की नाबालिग लड़की को अगवा कर लिया गया। लड़की का अपहरण स्कॉर्पियो गाड़ी में किया गया, जिसमें कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार भी शामिल थे। उस रात लड़की को जबरन गाड़ी में खींचा गया और फिर उसके साथ गैंगरेप किया गया। करीब दो घंटे बाद जब उसकी हालत बिगड़ी, तो आरोपित उसे फेंक कर भाग गए। यह पूरी घटना न केवल हैरान कर देने वाली थी, बल्कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी को चुनौती देने वाली भी। पीड़िता के परिवार वाले जब उसकी हालत देखकर चौकी पहुंचे, तो वहां से उन्हें भगा दिया गया। इसके बाद शिकायत दर्ज हुई, लेकिन आरोपियों के नाम हटा दिए गए और मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया गया।
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पुलिस कार्रवाई और फेरबदल
यह मामला जैसे-जैसे सामने आया, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बुधवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को हटा दिया। आरोप था कि यह पूरा क्षेत्र उनके जिम्मे का था और उन्होंने लापरवाही बरती। साथ ही, सचेंडी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को भी सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं लगाईं और तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश किया। इससे साफ था कि पुलिस की मिलीभगत और लापरवाही का ही परिणाम था कि आरोपियों को पकड़ने में देरी हुई और मामला बिगड़ गया।
मामले की जांच और मुख्य आरोपी का पर्दाफाश
इस पूरे प्रकरण की जांच एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह को सौंपी गई है। उन्होंने तुरंत जांच शुरू की और घटना स्थल का दौरा किया। लड़की ने अपने बयान में बताया कि उस रात वह घर से निकली थी, तभी आरोपी स्कॉर्पियो सवार दो लड़कों ने उसे जबरन गाड़ी में खींच लिया। इनमें से एक पुलिसकर्मी था। दोनों ने सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। लड़की के भाई ने आरोप लगाया कि आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या और पत्रकार शिवबरन ने ही उसके साथ दुष्कर्म किया। वह दोनों करीब दो घंटे बाद लड़की को घर के बाहर बेहोशी की हालत में छोड़कर भाग गए।
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जब पुलिस परिजनों को लेकर पहुंची, तो आरोपियों का नाम ना लेकर, आरोपियों को अज्ञात कर दिया गया। मेडिकल रिपोर्ट भी पीड़िता का बयान और आरोपों की पुष्टि करती है। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी दरोगा ने उससे धमकियां दीं और कहा कि अगर नाम आया तो कार्रवाई होगी। इन धमकियों से परिजन डरे हुए हैं। आरोपी दरोगा का क्षेत्र में आना-जाना बना रहा और उसकी दोस्ती पत्रकार शिवबरन से भी देखी गई। पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है, और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें लगाई गई हैं।
स्कॉर्पियो और आरोपी पुलिसकर्मी का खुलासा
पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो (UP 78 JJ 9331) को जब्त कर लिया है, जो दरोगा अमित कुमार मौर्या की है। अब तक की जांच में पता चला है कि वह घटना के समय सचेंडी में मौजूद था, जबकि उसकी तैनाती बिठूर थाने में थी। फिलहाल, वह फरार है और उसकी तलाश में टीमें लगी हुई हैं। आरोपी पत्रकार शिवबरन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि पुलिस का कहना है कि आरोपी दरोगा फरार है। उसकी तलाश जारी है।
जांच का अगला कदम और पुलिस का रूख
इस मामले की जांच एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह कर रहे हैं। वह घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ कर रहे हैं। फोरेंसिक टीम सबूत जुटाने में लगी है। पुलिस का कहना है कि इस जघन्य अपराध में शामिल सभी आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।