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गाजियाबाद में पासपोर्ट फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। तीन गांवों के फर्जी पतों पर 22 पासपोर्ट बनवाए गए। दलालों और पोस्टमैन की मिलीभगत से सिस्टम को चकमा दिया गया, जिससे सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Ghaziabad: गाजियाबाद में एक बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने आधार सत्यापन, पुलिस जांच और एलआईयू (LIU) जैसी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि जिले के तीन गांवों के फर्जी पतों का इस्तेमाल कर कुल 22 पासपोर्ट बनवाए गए, जबकि इन पतों पर संबंधित आवेदक कभी रहे ही नहीं।
इस मामले में पुलिस ने पासपोर्ट रैकेट से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दलाल विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, अमनदीप सिंह, सतवंत कौर और एक सरकारी कर्मचारी पोस्टमैन अरुण शामिल हैं।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पोस्टमैन अरुण फर्जी पतों पर पासपोर्ट की डिलीवरी करने के बजाय उन्हें सीधे पासपोर्ट गैंग के सदस्यों तक पहुंचाता था। इसी कड़ी में यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक बिना पकड़े चलता रहा।
सूत्रों के अनुसार, फर्जी तरीके से बनवाए गए अधिकांश पासपोर्ट सिख समुदाय के नाम पर बताए जा रहे हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका है।
इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में होने वाले आधार सत्यापन, पुलिस वेरिफिकेशन और एलआईयू जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब तीन स्तरों पर जांच होती है, तो फिर फर्जी पते कैसे पास हो गए? क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर सिस्टम के भीतर गहरी मिलीभगत?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बिंदु पर भी विस्तृत जांच की जा रही है और संबंधित विभागों से जवाब मांगा जाएगा।
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी केवल मोहरे हो सकते हैं और इस रैकेट के पीछे और भी बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। पासपोर्ट कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड, पोस्ट ऑफिस की डिलीवरी रिपोर्ट और स्थानीय स्तर पर किए गए सत्यापन दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है।