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करीब 25 साल के लंबे इंतजार और 4.5 साल के तेज निर्माण के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन हो गया है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ NCR की कनेक्टिविटी बदल देगा बल्कि सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी नया बेंचमार्क सेट करेगा।
अब हकीकत बना Noida Airport ( Photo Source : Dynamite News)
Greater Noida: सुरक्षा के कड़े घेरे, हर एंट्री पॉइंट पर नजर, और चप्पे-चप्पे पर तैनात एजेंसियां… गौतम बुद्ध नगर का जेवर इलाका शनिवार को किसी हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन जैसा नजर आया। वजह थी देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के उद्घाटन का दिन। प्रधानमंत्री ने जिस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नींव साढ़े चार साल पहले रखी थी, आज उसी प्रोजेक्ट का पहला चरण हकीकत बनकर सामने आ गया। 25 साल के लंबे इंतजार, सियासी फैसलों और जमीन से जुड़े संघर्षों के बाद आखिरकार जेवर अब उड़ान भरने को तैयार है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कहानी आज की नहीं है। इसकी शुरुआत साल 2001 में हुई थी, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की सरकार में इस प्रोजेक्ट का सपना देखा गया था। उस दौर में जेवर तक पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती था। संकरी सड़कों और लंबा समय लेने वाले रास्तों से गुजरकर लोग यहां पहुंचते थे। लेकिन वक्त बदला, योजनाएं बदलीं और आखिरकार यह सपना जमीन पर उतरने लगा। करीब 25 वर्षों तक यह प्रोजेक्ट फाइलों और प्लानिंग में उलझा रहा, लेकिन अब यह देश के सबसे बड़े एविएशन प्रोजेक्ट्स में शामिल हो चुका है।
इस मेगा प्रोजेक्ट की असली रफ्तार साल 2019 में आई, जब 29 नवंबर को स्विट्जरलैंड की कंपनी Zurich Airport International AG को इसका टेंडर मिला। इसके बाद 7 अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर हुए और प्रोजेक्ट को आधिकारिक रूप से आगे बढ़ाया गया। 2021 में मास्टरप्लान को मंजूरी मिली और 25 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया। इसके बाद निर्माण का काम तेजी से शुरू हुआ।
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करीब साढ़े चार वर्षों में 11,200 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा कर लिया गया। निर्माण कार्य के लिए Tata Projects Limited को जिम्मेदारी दी गई, जिसने तेजी से काम करते हुए इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा किया। एयरपोर्ट परिसर में होटल, कार्गो हब, डिजिटल सिस्टम और अन्य आधुनिक सुविधाओं का भी विकास किया गया, जिससे यह एयरपोर्ट शुरुआत से ही वर्ल्ड-क्लास बने।
इस एयरपोर्ट को सिर्फ यात्री सुविधा तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां 80 एकड़ में एक बड़ा कार्गो हब विकसित किया गया है, जिसके लिए Air India SATS को चुना गया। डिजिटल सुविधाओं के लिए Amadeus IT Group के साथ समझौता किया गया, जिससे डिजी यात्रा, बायोमेट्रिक चेक-इन और स्मार्ट बोर्डिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा इनफ्लाइट किचन, ग्राउंड हैंडलिंग और ईंधन सप्लाई के लिए भी कई बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी की गई है।
एयरपोर्ट के ऑपरेशन से पहले कई अहम टेस्टिंग चरण पूरे किए गए। IndiGo और Akasa Air जैसी एयरलाइंस के साथ समझौते किए गए। दिसंबर 2024 में इंडिगो की टेस्ट फ्लाइट ने यहां सफल लैंडिंग की, जिससे यह साफ हो गया कि एयरपोर्ट ऑपरेशन के लिए तैयार है। मार्च 2026 में नागरिक उड्डयन से जुड़ी एजेंसियों ने इसे हरी झंडी दे दी और लाइसेंस भी जारी कर दिया गया।
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प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को देखते हुए पूरे इलाके को हाई सिक्योरिटी जोन में तब्दील कर दिया गया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर एसपीजी, एनएसजी, CISF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया। हर रास्ते पर कड़ी निगरानी रखी गई और क्विक रिस्पॉन्स टीम भी अलर्ट मोड में रही। यहां तक कि कार्यक्रम में काले कपड़े पहनकर आने पर भी रोक लगा दी गई। बिना पास के किसी को एंट्री नहीं दी गई और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी पाबंदी लगाई गई।
प्रधानमंत्री की जनसभा को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए। बसों के जरिए लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी संस्थानों को दी गई। प्रशासन ने इसके लिए पूरा ड्यूटी चार्ट तैयार किया था। विधायक, सांसद, पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न संस्थानों के लोग इस आयोजन में जुटे नजर आए।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब पूरी तरह तैयार है और जल्द ही यहां से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू होंगी। यह एयरपोर्ट न सिर्फ NCR के ट्रैफिक का दबाव कम करेगा, बल्कि उत्तर भारत के एविएशन सेक्टर में भी बड़ा बदलाव लाएगा। कुल मिलाकर, 25 साल की लंबी कहानी, हजारों करोड़ का निवेश और लाखों लोगों की उम्मीदें- सब आज एक नई उड़ान में बदल चुकी हैं।