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झाड़ियों में जंग खा रहीं गोल्फ कार्ट (IMG: Dynamite News)
Mirzapur: मिर्जापुर के प्रसिद्ध विंध्याचल धाम में देशभर से श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या बुजुर्गों, महिलाओं और अशक्त श्रद्धालुओं की भी होती है। ऐसे श्रद्धालुओं को मंदिर और विंध्य कॉरिडोर क्षेत्र में आने-जाने में परेशानी न हो, इसके लिए नगर पालिका परिषद मीरजापुर की ओर से निःशुल्क गोल्फ कार्ट और ई-वाहनों की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया था।
लेकिन अब इन वाहनों की जो तस्वीर सामने आई है, वह इस दावे पर सवाल खड़े करती है। विंध्याचल के STP परिसर में आधा दर्जन से अधिक गोल्फ कार्ट झाड़ियों और बेलों के बीच खड़ी दिखाई दे रही हैं। कई वाहनों पर जंग के निशान साफ नजर आ रहे हैं। लंबे समय तक खुले में खड़े रहने के कारण इन वाहनों के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इन गोल्फ कार्ट के बोनट पर नगर पालिका परिषद मीरजापुर की ओर से लगाए गए पोस्टर अब भी नजर आ रहे हैं। पोस्टर पर लिखा है- ‘दिव्यांग एवं अशक्त जनों को निःशुल्क गोल्फ कार्ट, सौजन्य: नगर पालिका परिषद मीरजापुर।’ यानी जिस सुविधा का उद्देश्य जरूरतमंद श्रद्धालुओं को सहूलियत देना था, उसकी हकीकत अब सवालों के घेरे में है। मौके पर खड़ी गाड़ियों पर चढ़ी झाड़ियां और बेलें बता रही हैं कि इनका इस्तेमाल लंबे समय से नियमित तौर पर नहीं हो रहा है।
गोल्फ कार्ट जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों को लंबे समय तक खुले में खड़ा रखना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर बैटरी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और दूसरे संवेदनशील पुर्जों के नियमित रखरखाव की जरूरत होती है। मौके पर मौजूद वाहनों की हालत को देखकर यह सवाल उठ रहा है कि इनका नियमित रखरखाव किया जा रहा है या नहीं। अगर वाहन लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं तो उनकी बैटरी और दूसरे उपकरणों की स्थिति क्या है, इसका जवाब भी जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।
गोल्फ कार्ट के अलावा सीवेज फीड पंप हाउस के पास एक बड़ी ग्रीन पैसेंजर ई-बस भी खड़ी दिखाई दे रही है। यह वाहन भी धूल और खुले वातावरण में खड़ा है। एक तरफ विंध्याचल धाम में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु आवागमन की सुविधा की जरूरत महसूस करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए ई-वाहन ही इस्तेमाल के बजाय परिसर में खड़े नजर आ रहे हैं।
नगर पालिका की ओर से वाहनों पर निःशुल्क सेवा का प्रचार किया गया। लेकिन अब जब यही वाहन झाड़ियों और कीचड़ के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं तो सवाल उठता है कि आखिर इनका इस्तेमाल कितने समय तक और कितने श्रद्धालुओं के लिए हुआ? अगर वाहनों को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लाया गया था तो इनके संचालन का समय, रूट और ड्राइवरों की व्यवस्था क्या है? कितने दिव्यांग और अशक्त श्रद्धालुओं ने इस सुविधा का लाभ लिया? इन वाहनों के रखरखाव पर कितना खर्च हुआ? ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
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स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर इन वाहनों को सरकारी अथवा CSR मद से उपलब्ध कराया गया है तो इन्हें इस तरह खुले में क्यों छोड़ा गया है। सार्वजनिक संसाधनों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है, न कि उन्हें अनुपयोगी बनाना। अगर किसी तकनीकी या प्रशासनिक वजह से गोल्फ कार्ट और ई-बसों का संचालन बंद है तो नगर पालिका को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि इन्हें दोबारा श्रद्धालुओं की सेवा में कब तक लगाया जाएगा।
विंध्याचल धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन बढ़ने के साथ यहां सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ रही है। खासकर दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन किसी अतिरिक्त सुविधा से ज्यादा जरूरी व्यवस्था है। ऐसे में अगर उनके लिए उपलब्ध कराए गए वाहन ही जंग और झाड़ियों की चपेट में आ जाएं तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जाएगी। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग इन वाहनों की स्थिति की जांच कराए और अगर वाहन उपयोग योग्य हैं तो उन्हें तत्काल संचालन में लाया जाए।
Location : Mirzapur
Published : 24 August 2026, 4:10 PM IST