Mirzapur: जमीनी हकीकत की सच्चाई जब सामने आई, तो बोरिंग के नाम पर दिखा बड़ा खेल!

मीरजापुर के विंध्याचल स्थित एसटीपी परिसर में बोरिंग कार्य को लेकर सवाल उठे हैं। मौके पर पाइप जमीन में धंसा मिला, लेकिन मोटर या हैंडपंप नहीं दिखाई दिया। स्थानीय स्तर पर अन्य बोरिंगों को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। पूरे मामले में दस्तावेज और मौके की भौतिक जांच से स्थिति स्पष्ट होगी।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 25 August 2026, 2:04 PM IST
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Mirzapur: नगर पालिका परिषद मिर्जापूर में बोरिंग कार्यों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विंध्याचल स्थित एसटीपी परिसर में एक बोरिंग ऐसी स्थिति में मिली, जहां जमीन में पाइप तो डाला गया है, लेकिन मौके पर न सबमर्सिबल मोटर दिखाई दी और न ही हैंडपंप। पाइप के मुहाने पर बोरी बांधी गई है। ऐसे में बोरिंग कार्य की उपयोगिता और उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जमीन में पाइप धंसा मिला, पानी की व्यवस्था नदारद

एसटीपी परिसर में मौके पर दिखाई दे रही बोरिंग में केवल पाइप जमीन के अंदर डाला गया है। पाइप के ऊपरी हिस्से पर बोरी बांधी गई है। मौके पर जलापूर्ति के लिए कोई मोटर या हैंडपंप नजर नहीं आया।

इसके अलावा बोरिंग के आसपास कंक्रीट का चबूतरा या ऐसी अन्य संरचना भी दिखाई नहीं देती, जिससे इसका नियमित इस्तेमाल किया जा सके। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बोरिंग कराई गई थी तो उसे उपयोग में लाने की आगे की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं की गई।

दर्जनों बोरिंग को लेकर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि नगर पालिका क्षेत्र के अलग-अलग वार्डों और मोहल्लों में कई स्थानों पर बोरिंग कराकर उन्हें अधूरा छोड़ दिया गया है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि वास्तव में बड़ी संख्या में बोरिंग बिना मोटर, हैंडपंप या जलापूर्ति व्यवस्था के छोड़ दी गई हैं तो इनकी भौतिक जांच जरूरी हो जाती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित कार्यों पर कितना सरकारी बजट खर्च हुआ और मौके पर कितना काम हुआ।

फाइल और जमीन पर काम का मिलान जरूरी

बोरिंग कार्यों को लेकर सबसे बड़ा सवाल रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के मिलान का है। संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में किसी बोरिंग को पूरा दिखाया गया है या नहीं, इसका पता दस्तावेजों की जांच से ही चलेगा।

इसके लिए स्वीकृत कार्य, टेंडर, भुगतान, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका और मौके पर मौजूद निर्माण की स्थिति का मिलान किया जाना जरूरी है।

जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि नगर पालिका क्षेत्र में कराई गई बोरिंग की भौतिक जांच कब होगी। यदि प्रशासन प्रत्येक बोरिंग स्थल की वीडियोग्राफी कराकर रिकॉर्ड से उसका मिलान कराए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जांच में यदि काम अधूरा मिलने या भुगतान में अनियमितता की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसमें घोटाला या कमीशनखोरी हुई है। इसके लिए आधिकारिक जांच और दस्तावेजी साक्ष्य जरूरी होंगे।

जनता के पैसों से जुड़े काम पर जवाबदेही जरूरी

नगर क्षेत्र में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि किसी स्थान पर सरकारी धन से बोरिंग कराई गई है तो उसका उद्देश्य लोगों को पानी उपलब्ध कराना होना चाहिए।

अब देखना यह है कि नगर पालिका और जिला प्रशासन इस मामले को लेकर क्या कदम उठाते हैं और एसटीपी परिसर समेत अन्य बोरिंग कार्यों की भौतिक जांच कराते हैं या नहीं।

Location :  Mirzapur

Published :  25 August 2026, 2:03 PM IST

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