कौन हैं मंजिल सैनी, जिन्होंने प्रेग्नेंसी में क्रैक की UPSC और अपराधियों के दिल में बोया अपना खौफ

Manzil Saini Success Story: प्रेग्नेंसी के दौर में UPSC क्रैक कर पहली शादीशुदा महिला IPS बनीं मंजिल सैनी। किडनी रैकेट का पर्दाफाश, राष्ट्रपति वीरता पदक और 'लेडी सिंघम' बनने के अनोखे सफर की पूरी कहानी।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 25 September 2026, 3:56 PM IST
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New Delhi: जहां अक्सर लोग जिम्मेदारियों के आगे घुटने टेक देते हैं, वहीं मंजिल सैनी ने मुश्किलों को अपनी ताकत बनाकर इतिहास रच दिया। साल 2005 में जब वे गर्भवती थीं और शरीर थकावट व शारीरिक बदलावों से गुजर रहा था, तब उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) परीक्षा की तैयारी शुरू की।

अपनी लगन के दम पर उन्होंने न सिर्फ पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास की, बल्कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली देश की पहली शादीशुदा महिला अफसर बनीं। उत्तर प्रदेश कैडर में शामिल होकर उन्होंने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी रुकावट मंजिल नहीं रोक सकती।

अवैध किडनी रैकेट का पर्दाफाश कर बनीं लेडी सिंघम

मंजिल सैनी की पहचान एक बेहद कड़क और ईमानदार पुलिस अफसर के रूप में हुई। साल 2008 में उन्होंने यूपी और गुरुग्राम में फैले एक कुख्यात और अंतरराष्ट्रीय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया, जिससे वे पूरे देश में 'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर हो गईं।

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मुजफ्फरनगर, मथुरा और इटावा जैसे अति-संवेदनशील जिलों में अपनी सख्त कार्यशैली का लोहा मनवाने के बाद मई 2016 में उन्हें लखनऊ का एसएसपी (SSP) बनाया गया। उत्तर प्रदेश के इतिहास में लखनऊ जैसे वीआईपी शहर की कमान संभालने वाली वे पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं।

खतरनाक एनकाउंटर के लिए मिला राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक

साल 2017 में मेरठ में हुए एक डॉक्टर के हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड में मंजिल सैनी ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपहृत डॉक्टर को सुरक्षित छुड़ाया और अपराधियों का सफाया किया। इस अदम्य साहस और शौर्य के लिए उन्हें साल 2024 में देश के प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक' से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान पाने वाली वे उत्तर प्रदेश की दूसरी महिला आईपीएस अफसर हैं। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से गोल्ड मेडल जीतने वाली मंजिल सैनी का पूरा करियर साहस और निडरता की अनूठी मिसाल है।

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सार्वजनिक रूप से स्वीकारी प्रशासनिक चूक

मंजिल सैनी का व्यक्तित्व सिर्फ उनकी बहादुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी प्रशासनिक जवाबदेही भी बेजोड़ है। फरवरी 2017 में जब लखनऊ में व्यापारी श्रवण साहू की हत्या हुई, तो सुरक्षा न दे पाने की पुलिस विभाग की चूक को उन्होंने मीडिया के सामने खुले तौर पर स्वीकार किया। बहादुरी के लिए पदक जीतना और चूक होने पर सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी लेना- यह ईमानदारी उन्हें एक आम अफसर से कहीं आगे ले जाकर स्थापित करती है।

Location :  New Delhi

Published :  25 September 2026, 3:50 PM IST

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