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दिग्विजय भाटी और आईपीएस अविनाश पांडेय (IMG: Dynamite News)
Meerut: मेरठ में समाजवादी पार्टी के नेताओं की कथित पिटाई का मामला अब बड़ा पुलिस एक्शन में बदल गया है। नेताओं के गंभीर आरोपों के बाद नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति ने चार्ज संभालते ही कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अखिलेश गौड़ समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं इस पूरे मामले की जांच सहारनपुर DIG अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।
सपा नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। दिग्विजय भाटी चोटिल आंख पर पट्टी बांधकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे और अपनी चोट दिखाते हुए भावुक हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की और उन्हें बेरहमी से पीटा गया। दिग्विजय भाटी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि SSP अविनाश पांडेय उनसे इतनी नाराजगी क्यों रखते थे? आरोप है कि उन्हें जूतों और बूटों से मारा गया और तब तक पीटा गया, जब तक वह बेहोश नहीं हो गए। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अखिलेश गौड़ के हवाले कर दिया गया, जो उन्हें पुलिस लाइंस स्थित SOG ऑफिस लेकर गए। वहां भी उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया गया।
दिग्विजय भाटी ने पुलिसकर्मियों पर अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि SOG ऑफिस में मोबाइल पर गाना बजाया गया और उनसे उस पर डांस करने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वह ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे, फिर भी उन्हें परेशान किया गया और पुलिसकर्मी हंसते रहे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "पुलिसवालों ने मोबाइल पर गाना बजाया- ‘चोली के पीछे क्या है…।’ हमसे बार-बार इस गाने पर नाचने को कहा। हम खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, फिर भी हमें नचवाया जा रहा था। सब हम लोगों पर हंस रहे थे। हम हाथ जोड़ रहे थे, लेकिन किसी को तरस नहीं आया।"
हालांकि मेरठ पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया था। पुलिस का कहना था कि दोनों लोग हिस्ट्रीशीटर हैं और उन्हें चोटें स्कूटी से गिरने के कारण आई हैं। वहीं इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने भी सफाई देते हुए कहा था कि वह मौके पर बाद में पहुंचे थे और उन्हें SSP की ओर से जो निर्देश दिए गए थे, उन्होंने उसका पालन किया।
मामले के तूल पकड़ने के बाद एडीजी मेरठ भानु भास्कर ने जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर DIG अभिषेक सिंह को दी। इसके बाद शासन ने गुरुवार देर रात 9 IPS अधिकारियों के तबादले किए। इसमें मेरठ SSP अविनाश पांडेय को हटाकर लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर से अटैच कर दिया गया।
दिग्विजय भाटी का आरोप है कि 19 अगस्त को वह और जिलाध्यक्ष मोहित जाटव SSP से मिलने पहुंचे थे। दोनों ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में अपनी बात रखने गए थे। उनका कहना था कि वे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, फिर भी पुलिस ने उन्हें आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि SSP से मुलाकात के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और बाद में मारपीट की गई। हालांकि अब इस मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।
Location : Meerut
Published : 22 August 2026, 2:24 PM IST