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मैनपुरी में बेसिक शिक्षक समायोजन 3.0 में सीनियर शिक्षकों को दरकिनार कर जूनियर को समायोजित करने, सरप्लस व महिला शिक्षकों के साथ अन्याय करने के आरोप लगे। शिक्षक संघ ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिक्षक संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग की
Mainpuri: जनपद मैनपुरी में बेसिक शिक्षक समायोजन 3.0 को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पर नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से समायोजन करने का आरोप लगाया है। इस मामले ने न सिर्फ शिक्षकों के बीच रोष पैदा किया है, बल्कि समायोजन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत में बताया गया है कि कई विद्यालयों में सीनियर शिक्षकों के स्थान पर जूनियर शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया, जबकि नियमानुसार पहले सीनियर शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाना चाहिए था। विशेष रूप से पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुतुबपुर बुजुर्ग और उदनाडांडा विकासखंड करहल में यह नियम उल्लंघन सामने आया है। शिक्षकों का आरोप है कि इन विद्यालयों में नियमों की अनदेखी कर जूनियर शिक्षकों को बनाए रखा गया।
इसके अलावा, कई विद्यालयों में सरप्लस शिक्षक होने के बावजूद उन्हें समायोजन से मुक्त रखा गया, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। मैनपुरी नगर क्षेत्र में भी उपलब्ध डिफिसिट विद्यालयों के होते हुए, सरप्लस शिक्षकों को जानबूझकर वहीं रोके जाने का आरोप शिक्षकों ने लगाया है।
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला शिक्षकों को असुविधाजनक और दूरस्थ स्थानों पर स्थित विद्यालयों में समायोजित किया गया है, जिससे उनके शोषण की आशंका उत्पन्न हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकार के समायोजन से न केवल महिला शिक्षकों की सुरक्षा और सुविधा प्रभावित होती है, बल्कि उनके पेशेवर जीवन पर भी असर पड़ता है।
इसके अलावा, यू-डायस पोर्टल पर छात्र संख्या कम दर्ज होने के कारण कई विद्यालयों में शिक्षकों को गलत तरीके से सरप्लस घोषित कर दिया गया। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि इसके लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं हैं। उनका मानना है कि वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर ही सरप्लस तय किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।
शिक्षकों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि समायोजन प्रक्रिया में नियमों का पालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, अन्यथा यह पूरे शैक्षणिक तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा।
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अरुण यादव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधि, ने बताया कि शिक्षक संघ इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और जल्द ही संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे जाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक संघ लगातार प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को रख रहा है और यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संघ आंदोलन करने पर भी विचार कर सकता है।
इस मामले में जिला प्रशासन ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन शिक्षक संघ और स्थानीय शिक्षक इसके समाधान के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।