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रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। यूपी से 14वें आरोपी गोलू पंडित को हिरासत में लिया गया है। अब उसे मुंबई लाकर पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले के कई राज खुल सकते हैं।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस में बड़ा खुलासा
Agra: फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई सनसनीखेज फायरिंग मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस केस में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बीच अब 14वें आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जिससे पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है। इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि अब इस साजिश के कई और छिपे पहलू सामने आ सकते हैं।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश एसटीएफ की मदद से आरोपी गोलू पंडित को यूपी से हिरासत में लिया है। उसे जल्द ही मुंबई लाया जा रहा है, जहां अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, यह गिरफ्तारी बेहद अहम है क्योंकि इससे पूरे नेटवर्क और साजिश की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को मुंबई लाने के बाद ही उसकी भूमिका को लेकर साफ तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल उससे पूछताछ की तैयारी चल रही है। उम्मीद है कि उसकी निशानदेही पर और भी खुलासे हो सकते हैं और इस मामले में शामिल अन्य लोगों तक भी पुलिस पहुंच सकती है।
इस पूरे मामले में एक बड़ा एंगल लॉरेंस बिश्नोई गैंग का भी सामने आया है। जुहू इलाके में हुई इस फायरिंग की जिम्मेदारी इसी गैंग ने ली थी, जिसके बाद पुलिस ने इसकी जांच को और तेज कर दिया। इससे पहले 1 फरवरी 2026 को हुई इस घटना में पुलिस 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और हथियार भी बरामद किए जा चुके हैं।
दरअसल, 1 और 2 फरवरी 2026 की दरमियानी रात मुंबई में फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के आवास ‘शेट्टी टॉवर’ पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई थी। देर रात हुई इस वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और फिल्म इंडस्ट्री तक में हड़कंप मच गया। जांच में सामने आया कि यह हमला कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित आपराधिक गैंग का हाथ था। पुलिस के मुताबिक, कुख्यात शुभम लोणकर गैंग ने इस वारदात को अंजाम दिया। इस गैंग का मकसद सिर्फ डर फैलाना नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री और आम लोगों में खौफ पैदा कर रंगदारी वसूलना था। घटना के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच तुरंत एक्शन में आई और मामले में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। इसके बाद आरोपियों की तलाश के लिए लगातार छापेमारी और जांच शुरू की गई। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने एक-एक कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।