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महराजगंज के जिलाधिकारी ने लक्ष्मीपुर ब्लाक के ग्राम प्रधान के खिलाफ एक्शन लिया है। नियमों के उल्लंघन पर जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर अंतिम जांच के आदेश दिए हैं।
महराजगंज के जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा
महराजगंज: जनपद के विकास खण्ड लक्ष्मीपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसवनिया विशुन में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। विस्तृत जांच के बाद 6,37,254 रुपए की शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने ग्राम प्रधान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों को अतिक्रमित (सीज) कर दिया है।
यह कार्रवाई ग्रामीणों घनश्याम, बैजनाथ, कृपाशंकर, शिवकुमार सहित अन्य द्वारा 21 मार्च 2025 को दी गई शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में ग्राम पंचायत सिसवनिया विशुन में मनरेगा योजना के अंतर्गत कराए गए मिट्टी, चकमार्ग और चकबन्ध कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया गया था।
प्रारंभिक जांच के लिए परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, को जांच अधिकारी नामित किया गया। जांच में कुल 46 बिंदुओं पर परीक्षण किया गया, जिसमें से 42 बिंदु असत्य एवं निराधार पाए गए, जबकि चार मामलों में गंभीर अनियमितता प्रमाणित हुई।
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जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ग्राम पंचायत में Land Development (मिट्टी कार्य) से संबंधित चार कार्यों को मनरेगा के Annual Master Circular 2024-25 में निर्धारित Durability अवधि (तीन वर्ष) से कम समय में दोबारा कराया गया। यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।
इन कार्यों में—
राजेन्द्र धोबी के खेत से सोनवल सिवान तक,
सुरेश के खेत से बेलवा जंगल तक,
बृजलाल के खेत से मदरहना सिवान तक,
मिश्री के घर से थरौली सिवान तक
चकबन्ध/चकमार्ग पर मिट्टी कार्य कराए गए, जिनमें कुल 6,37,254 रुपए की धनराशि वसूली योग्य पाई गई।
प्रधान एवं तत्कालीन ग्राम सचिव द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए जिलाधिकारी ने माना कि आरोपों के खंडन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही, स्वयं स्वीकार किया गया कि कार्य तीन वर्ष से कम अंतराल में कराए गए हैं।
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इस आधार पर उ.प्र. पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1)(छ) के तहत ग्राम प्रधान मुराती देवी के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार अतिक्रमित कर दिए गए हैं। अंतिम जांच पूरी होने तक ग्राम पंचायत का संचालन तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा।
अंतिम जांच के लिए कन्हैया यादव (जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी) और सुधीर कुमार वर्मा (जूनियर इंजीनियर, लोक निर्माण विभाग) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।