Maharajganj News: जनसूचना या गुमराह करने की कोशिश? सीएचसी पर आरटीआई नियमों की अनदेखी का आरोप

महराजगंज के बृजमनगंज सीएचसी में आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर आवेदक से 7,156 रुपये शुल्क जमा कराया गया, लेकिन बाद में जानकारी को गोपनीय बताकर देने से इनकार कर दिया गया। मामला आरटीआई कानून की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Updated : 2 January 2026, 6:54 PM IST
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Maharajganj: सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मंशा पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब बृजमनगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ने एक आरटीआई आवेदक से हजारों रुपये फोटोकॉपी शुल्क के रूप में जमा कराने के बाद सूचना देने से इनकार कर दिया। यह मामला कोल्हुई थाना क्षेत्र के परसौना गांव निवासी कृष्ण मोहन शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2022 से 2025 के बीच सीएचसी में हुए विभिन्न वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारियां मांगी थीं।

सूचना के अधिकार पर सवाल

कृष्ण मोहन शर्मा ने आरटीआई के तहत सीएचसी बृजमनगंज से कुल पांच बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इनमें सीएचसी के मेंटेनेंस के लिए अवमुक्त धनराशि, प्रत्येक सोमवार को बीडब्ल्यूआर के लिए प्राप्त राशि का विवरण, किशोर-किशोरियों की बैठकों में किए गए खर्च, एचआरपी मद में प्राप्त धनराशि तथा अनमोल ऐप में फीडिंग के लिए जारी धनराशि के बिल-बाउचर शामिल थे। आवेदक का कहना है कि ये सभी सूचनाएं सार्वजनिक धन से जुड़ी हैं और इन्हें गोपनीय नहीं माना जा सकता।

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आवेदन के बाद सीएचसी प्रशासन ने 6 अक्टूबर 2025 को एक पत्र जारी कर बताया कि मांगी गई मदों में आई धनराशि का विवरण उपलब्ध है। हालांकि, विस्तृत बिल-बाउचर उपलब्ध कराने के लिए 3,578 पेज की फोटोकॉपी बताई गई और इसके एवज में 7,156 रुपये सीएचसी खाते में जमा कराने को कहा गया। कृष्ण मोहन शर्मा ने अधीक्षक के नाम ड्राफ्ट बनवाकर निर्धारित राशि तत्काल जमा करा दी।

मामला यहीं नहीं रुका। शुल्क जमा होने के कुछ समय बाद ही सीएचसी की ओर से एक और पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि मांगी गई सूचनाएं गोपनीय प्रकृति की हैं, इसलिए इन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। इतना ही नहीं, पत्र में आगे किसी भी प्रकार का पत्राचार न करने की चेतावनी भी दी गई। इस घटनाक्रम से आवेदक ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

पहले 7 हजार जमा, फिर सूचना को बताया गोपनीय

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि मांगी गई सूचनाएं गोपनीय थीं, तो फिर पहले फोटोकॉपी शुल्क क्यों मांगा गया और पैसा क्यों जमा कराया गया। जानकारों का कहना है कि आरटीआई अधिनियम के तहत यदि कोई सूचना अपवाद की श्रेणी में आती है, तो उसे शुरू में ही स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए। शुल्क लेकर बाद में सूचना से इनकार करना आरटीआई कानून की भावना के विपरीत माना जा रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर जब बृजमनगंज सीएचसी के अधीक्षक डॉ सुशील गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने कहा, "अभी हम इस पर कुछ नहीं कह सकते। सोमवार को अकाउंटेंट के आने के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।" उनके इस जवाब से भी स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।

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स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आवेदक को उसकी मांगी गई सूचना मिलती है या नहीं। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

Location : 
  • Maharajganj

Published : 
  • 2 January 2026, 6:54 PM IST

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