22 पुलिसकर्मियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत! विशेष अदालत का FIR आदेश खारिज, घघौली बसंतपुर मामले में बड़ा मोड़

दो महिलाओं की शिकायत पर 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश को क्यों निरस्त किया और BNSS की प्रक्रिया पर क्या जोर दिया?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 10 October 2026, 9:02 PM IST
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Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक उपनिरीक्षक समेत 22 पुलिसकर्मियों को राहत दी है। हाईकोर्ट ने विशेष एससी/एसटी अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला न्यायमूर्ति संतोष राय ने उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव की ओर से दाखिल अपील पर सुनाया।

दो महिलाओं ने लगाए थे गंभीर आरोप

मामले के अनुसार, दो महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर घर में घुसने, अभद्रता करने, जातिसूचक टिप्पणियां करने और शौचालय जाने से रोकने जैसे आरोप लगाए थे। शिकायतों के आधार पर विशेष एससी/एसटी अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। महिलाओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष के रूप में इस फैसले को नहीं देखा जाना चाहिए।

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BNSS की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने दिया जोर

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े मामलों में न्यायिक आदेश पारित करते समय निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करने के महत्व पर जोर दिया। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) और धारा 175(3) के प्रावधानों के संदर्भ में प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार-क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया।

BNSS की धारा 173(4) पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से संबंधित है। वहीं, धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा जांच का आदेश देने की शक्ति और उससे जुड़ी प्रक्रिया का प्रावधान है। ऐसे मामलों में लागू कानूनी शर्तों का पालन करना आवश्यक होता है।

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विशेष अदालत का आदेश निरस्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष एससी/एसटी अदालत के एफआईआर दर्ज करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। इससे घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव से जुड़े मामले में उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव समेत 22 पुलिसकर्मियों को राहत मिली है।

इस फैसले का प्रमुख पहलू न्यायिक आदेशों में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया और अधिकार-क्षेत्र के पालन से जुड़ा है। हालांकि, विशेष अदालत का आदेश निरस्त होने का अर्थ यह नहीं है कि शिकायतकर्ताओं के आरोपों को अदालत ने अंतिम रूप से गलत ठहरा दिया है। मामले में आरोपों की सत्यता और हाईकोर्ट के आदेश के सटीक कानूनी प्रभाव को समझने के लिए विस्तृत न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण होगा।

Location :  Maharajganj

Published :  10 October 2026, 9:02 PM IST

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