महंत नृत्यगोपाल दास: राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष बनने तक का सफर

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनका जीवन रामभक्ति, संत परंपरा और मंदिर आंदोलन के संघर्षों से जुड़ा रहा है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 1 July 2026, 7:18 PM IST
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Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अयोध्या की मशहूर 'मणि राम दास की छावनी' के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास (89) को तबीयत बिगड़ने के बाद लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें सोमवार  को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों की एक खास टीम उनका इलाज कर रही है। आइए जानते है उनके आध्यात्मिक सफर के बारे में।

मथुरा से अयोध्या तक का आध्यात्मिक सफर

महंत नृत्यगोपाल दास का जन्म 11 जून 1938 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना क्षेत्र के कहौला गांव में हुआ था। बचपन से ही उनका मन आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित था। बताया जाता है कि केवल 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने गृहस्थ जीवन छोड़कर वैराग्य का मार्ग अपना लिया और अयोध्या पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने काशी में संस्कृत और शास्त्रों का अध्ययन किया। शिक्षा पूरी करने के बाद वे दोबारा अयोध्या लौटे और मणिरामदास छावनी से जुड़ गए। यहीं से उन्होंने संत परंपरा और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

राम मंदिर आंदोलन में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

महंत नृत्यगोपाल दास का नाम राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संतों में लिया जाता है। उन्होंने दिगंबर अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास सहित कई संतों के साथ मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाया। आंदोलन के दौरान वे साधु-संतों, कारसेवकों और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करते रहे। 1980 और 1990 के दशक में जब राम जन्मभूमि आंदोलन अपने निर्णायक दौर से गुजर रहा था, तब महंत नृत्यगोपाल दास लगातार अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिए। उन्होंने जनजागरण अभियान, धार्मिक सभाओं और आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

ताला खुलने से लेकर शिलान्यास तक रहे सक्रिय

साल 1986 में राम जन्मभूमि परिसर का ताला खुलने से पहले चले आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद 1989 में हुए शिलान्यास कार्यक्रम और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी उन्होंने संत समाज का नेतृत्व किया। 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की कारसेवा के दौरान अयोध्या पहुंचे हजारों कारसेवकों का मार्गदर्शन करने में भी उनकी अहम भूमिका रही। आंदोलन के दौरान कई बार प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी सक्रियता बनाए रखी।

2003 में संभाली श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कमान

महंत परमहंस रामचंद्र दास के निधन के बाद वर्ष 2003 में महंत नृत्यगोपाल दास को श्रीराम जन्मभूमि न्यास का अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में मंदिर निर्माण की तैयारियों को नई गति मिली। मंदिर के लिए पत्थरों की तराशी, शिलाओं के संरक्षण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगातार काम किया गया। उनके नेतृत्व में वर्षों तक मंदिर निर्माण की आधारभूत तैयारियां चलती रहीं, जिसने आगे जाकर भव्य मंदिर निर्माण की राह आसान की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। ट्रस्ट के सदस्यों ने सर्वसम्मति से महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष चुना। इसके बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी। भूमि पूजन से लेकर निर्माण कार्य की निगरानी तक कई महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका रही। वर्तमान में भी वे ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मंदिर से जुड़े धार्मिक और प्रशासनिक मामलों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

आज भी संत समाज के प्रमुख मार्गदर्शक

महंत नृत्यगोपाल दास लंबे समय से रामभक्ति, संत परंपरा और धार्मिक सेवा से जुड़े हुए हैं। राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष से लेकर भव्य मंदिर निर्माण तक वे निरंतर सक्रिय रहे हैं। आज भी वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मंदिर के विकास और उससे जुड़े धार्मिक कार्यों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

Location :  Ayodhya

Published :  1 July 2026, 7:18 PM IST

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