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ताजमहल की कहानी फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को अक्सर प्रेम की सबसे बड़ी निशानी कहा जाता है। लेकिन क्या वाकई शाहजहां और मुमताज महल का प्यार उतना ही गहरा था, जैसा इतिहास और लोकप्रिय कहानियों में बताया जाता है? या इसके पीछे राजनीति, सत्ता और शाही परंपराओं की भी कहानी छिपी है?
मुमताज महल की पहली मुलाकात
मुगल इतिहास के अनुसार, शाहजहां और मुमताज महल की पहली मुलाकात युवावस्था में हुई थी। मुमताज, जिनका असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था, शाहजहां की प्रिय बेगम मानी जाती थीं। 1612 में दोनों का निकाह हुआ और कहा जाता है कि मुमताज केवल पत्नी ही नहीं, बल्कि शाहजहां की भरोसेमंद सलाहकार भी थीं।
मुमताज की मृत्यु
इतिहासकारों के मुताबिक, शाहजहां की कई पत्नियां थीं, लेकिन मुमताज को विशेष स्थान प्राप्त था। वह अक्सर शाही यात्राओं और अभियानों में शाहजहां के साथ रहती थीं। 1631 में 14वें बच्चे को जन्म देते समय मुमताज की मृत्यु हो गई, जिसने शाहजहां को गहरे शोक में डाल दिया।
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कला और शाही वैभव का भी प्रदर्शन
इसके बाद बना ताजमहल - एक ऐसा मकबरा, जिसे बनाने में करीब 20 साल लगे और हजारों कारीगरों ने काम किया। लेकिन कुछ शोध यह भी बताते हैं कि ताजमहल केवल प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि मुगल साम्राज्य की शक्ति, कला और शाही वैभव का भी प्रदर्शन था।
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मुगल स्थापत्य और सत्ता का भव्य प्रतीक
इतिहासकारों के बीच इस बात पर बहस आज भी जारी है कि ताजमहल को सिर्फ लव स्टोरी के नजरिए से देखना कितना सही है। एक ओर यह शाहजहां के निजी दुख और मुमताज के प्रति लगाव की कहानी है, तो दूसरी ओर यह मुगल स्थापत्य और सत्ता का भव्य प्रतीक भी है।
Location : New Delhi
Published : 2 June 2026, 8:25 PM IST