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ताजमहल (Img : (pinterest)
Agra : देश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल ताजमहल एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। ताजमहल परिसर को भगवान अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर बताए जाने के दावे से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने विवादित परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग पर राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। इस सुनवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित अन्य विपक्षी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में आगरा की जिला अदालत के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनमें सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और अपर जिला जज ने ताजमहल परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार कर दिया था।
मामले के अनुसार, वर्ष 2015 से आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक दीवानी मुकदमा लंबित है। इस मुकदमे में दावा किया गया है कि ताजमहल परिसर वास्तव में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस संबंध में घोषणा करने की मांग की है।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने विवादित परिसर का सर्वे कराने और इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की थी। उनका कहना था कि सर्वे से परिसर की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। हालांकि, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और बाद में अपर जिला जज ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद इन आदेशों को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय की ओर से उनके मित्र हरिशंकर जैन सहित पांच अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से दाखिल की है। याचिका में भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और दो अन्य पक्षों को विपक्षी बनाया गया है। फिलहाल हाईकोर्ट ने किसी भी दावे के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है। जहां इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
Location : Agra
Published : 6 July 2026, 3:19 PM IST