नफरत के दौर में मोहब्बत की मिसाल; एक ही आंगन में मंदिर और मजार, हिंदू-मुस्लिम में अनूठा प्यार

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित भमरौआ गांव साम्प्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ शिव मंदिर और मजार एक-दूसरे के पास स्थित हैं, जहाँ दोनों समुदाय के लोग हर सुख-दुख में साथ मिलकर आपसी भाईचारे की खूबसूरत परंपरा को निभाते हैं।

Updated : 17 August 2026, 2:51 PM IST
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Rampur: रामपुर जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में आने वाला भमरौआ गांव आज पूरे देश के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी इबारत लिख रहा है। आमतौर पर जहाँ धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ाने की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, वहीं भमरौआ गांव इसके ठीक विपरीत एक अलग ही तस्वीर पेश करता है। यहाँ स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर और एक मजार इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि अगर दिल साफ हों, तो अलग-अलग आस्थाएं भी एक ही आँगन में सुकून से रह सकती हैं।

मंदिर की घंटी और मजार की अजान का साझा सुकून

इस छोटे से गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ का ऐतिहासिक शिवालय और मजार एक-दूसरे के बिल्कुल पास, कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। दशकों बीत चुके हैं, समय के साथ पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन यहाँ की हवा में आज भी आपसी विश्वास और प्रेम की खुशबू घुली हुई है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने कभी भी इन दोनों पवित्र स्थलों के बीच किसी तनाव या मतभेद को जन्म लेते नहीं देखा। यहाँ नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, बल्कि हर सुबह मंदिर की घंटियों की गूंज और मजार पर जलने वाले चिराग शांति का संदेश देते हैं।

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उत्सव कोई भी हो, चेहरे पर मुस्कान सबकी होती है

भमरौआ गांव की असली खूबसूरती तब और निखरकर सामने आती है जब कोई धार्मिक या सामाजिक आयोजन होता है। शिव मंदिर में जब महाशिवरात्रि का पर्व या कोई विशाल भंडारा होता है, तो मुस्लिम समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर सेवा करते हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। ठीक इसी तरह, अन्य अवसरों पर भी दोनों समुदाय के लोग बिना किसी झिझक के एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं। सुख हो या दुख, हर परिस्थिति में यह गांव एक परिवार की तरह व्यवहार करता है।

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बदलते दौर में उम्मीद की एक रोशन किरण

आज के दौर में जहां छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरियां पैदा होने लगी हैं, भमरौआ गांव का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक खुली किताब की तरह है। यह जगह हमें सिखाती है कि मजहब और पूजा-पद्धति भले ही अलग-अलग हों, लेकिन इंसानी रिश्तों और भाईचारे की डोर सबसे ऊपर होती है। यहाँ के लोग इस अनूठी परंपरा को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं और आने वाली पीढ़ी को भी यही संस्कार सौंप रहे हैं, ताकि यह मिसाल हमेशा आबाद रहे।

Location :  Rampur

Published :  17 August 2026, 2:51 PM IST

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