भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं: नाबालिग से रेप मामले में गोरखपुर कोर्ट ने सुनाया ऐसा फैसला, फूट-फूटकर रोने लगा आरोपी

गोरखपुर में वर्ष 2017 के नाबालिग अपहरण और दुष्कर्म मामले में अदालत ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत गोरखपुर पुलिस की प्रभावी पैरवी रंग लाई।

Gorakhpur: गोरखपुर में वर्षों बाद एक जघन्य अपराध के मामले में इंसाफ की गूंज सुनाई दी है। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराध में शामिल आरोपी को अदालत ने कड़ा संदेश देते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया। यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज को यह भी बता गया है कि ऐसे अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब थाना पिपराइच में एक नाबालिग के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का गंभीर मामला दर्ज किया गया था। मुकदमा संख्या 389/2017 के तहत अभियुक्त उमेश कुमार गौतम पुत्र अजय कुमार, निवासी सहवा, थाना रामपुर कारखाना, जनपद देवरिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। लंबे समय तक चले इस मुकदमे में पीड़िता और उसके परिवार ने न्याय की आस नहीं छोड़ी।

मौत से हुई गोरखपुर की सुबह, ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप की टक्कर में एक की गई जान

अदालत का सख्त फैसला

सोमवार को गोरखपुर जनपद की पॉक्सो कोर्ट संख्या-04 के अपर सत्र न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में साफ कहा कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध समाज की जड़ों को कमजोर करते हैं और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अभियुक्त को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

ऑपरेशन कनविक्शन बना अहम कड़ी

इस केस में दोषसिद्धि के पीछे उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान की अहम भूमिका रही। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश की इस पहल के तहत पुराने और गंभीर मामलों में मजबूत पैरवी पर विशेष ध्यान दिया गया। गोरखपुर पुलिस ने इस केस को प्राथमिकता पर लेते हुए लगातार मॉनिटरिंग की।

मौत किसी बुलावे का इंतजार नहीं करती: घूमने के लिए निकला था व्यक्ति, वापस घर लौटी लाश

पुलिस और अभियोजन की सराहनीय भूमिका

पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में विवेचक उप निरीक्षक हरेराम यादव, थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने पूरे मामले की बारीकी से निगरानी की। सटीक विवेचना और मजबूत पैरवी के चलते ही वर्षों पुराने इस केस में आरोपी को सजा दिलाई जा सकी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी सुजीत कुमार शाही और एसपीपी उमेश मिश्रा ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।

समाज के लिए सख्त संदेश

यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के लिए न्याय की जीत है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सख्त चेतावनी भी है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को देर-सबेर कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत गोरखपुर पुलिस की यह सफलता कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 19 January 2026, 8:11 PM IST

Advertisement
Advertisement