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रूस में गोली लगने से मरे शावेद का शव 7 महीने बाद परिजनों को सुपुर्द किया गया। परिवार में कोहराम, पूरे गांव में शोक की लहर, और अब जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं।
शावेद की मौत का रहस्य
Rampur: रामपुर के मसवासी क्षेत्र के गांव मंझरा फतेहगंज में 22 वर्षीय शावेद की मौत की खबर ने परिवार और पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। करीब 7 महीने पहले रूस में गोली लगने से हुई इस युवक की मौत की जानकारी अब जाकर परिजनों को दी गई है। रूस से आए शव को सुपुर्द करने के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस बीच, जांच एजेंसियां इस घटना के रहस्यमय पहलुओं की जांच में जुट गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक शावेद रोजगार के सिलसिले में करीब 9 महीने पहले रूस गया था। शुरुआत में वह वहां स्टील फर्नीचर बनाने का काम करता था और हॉस्टल में रहता था। दो महीने बाद, आर्मी के अधिकारियों ने उसे अपने साथ ले जाकर भर्ती कर लिया। बताया गया कि 2 अप्रैल को ड्यूटी के दौरान शावेद को गोली लग गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। शव 4 अप्रैल की तड़के दिल्ली एयरपोर्ट पर परिजनों को सुपुर्द किया गया। हालांकि, अभी तक इस पूरे मामले का खुलासा नहीं हो पाया है।
शावेद परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रूस गया था। शुरू में उसने स्टील फर्नीचर का काम किया और हॉस्टल में रहा। इसके बाद अचानक आर्मी में शामिल हो गया। उसने कुछ फोटो भी परिजनों को भेजीं, लेकिन परिजन अब भी हैरान हैं कि इतना कम समय में उनका बेटा कैसे आर्मी जॉइन कर गया।
शावेद की मौत के रहस्यमय पहलुओं को देखते हुए जांच एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रूस ने आखिर 7 महीने तक सूचना क्यों नहीं दी और शव भेजने में इतनी देरी क्यों हुई। पिछले कुछ महीने में परिजन लगातार बेटे से संपर्क करने की कोशिश में रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
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परिवार के अनुसार, शावेद का जाना उनके लिए एक बड़ा सदमा है। पूरे गांव ने शोक व्यक्त किया और परिवार को सांत्वना दी। दूल्हे हसन के पुत्र शावेद की मौत ने इलाके में मातम छा दिया है।