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खजनी, कौड़ीराम, गोला और बड़हलगंज क्षेत्र में मौसम का यह अचानक बदलाव किसानों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। खासतौर पर इन दिनों ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की बेचैनी और बढ़ा दी है। पढिए पूरी खबर
गोरखपुर में बढ़ी किसानों की चिंता
गोरखपुर: जिले में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे के बाद आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज हवाएं चलने लगीं, जिससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को लेकर किसानों के होश उड़ गए। इस समय जिले में करीब 60 प्रतिशत गेहूं की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है, जो मौसम की मार झेलने को मजबूर है।
खजनी, कौड़ीराम, गोला और बड़हलगंज क्षेत्र में मौसम का यह अचानक बदलाव किसानों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। खासतौर पर इन दिनों ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की बेचैनी और बढ़ा दी है। तेज हवा के साथ काले बादल देखकर किसान अपनी फसलों को लेकर बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।
मौसम का बदला हुआ रूप
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस समय फसल पूरी तरह पककर तैयार है और कटाई के कगार पर है। ऐसे में यदि तेज बारिश या ओले पड़ते हैं तो भारी नुकसान हो सकता है। बड़े किसान राजेश पांडेय, कमलेश पांडेय निवासी (रामपुर पांडेय), रमजी दुबे, उदयभान मणि त्रिपाठी (डोडो), नागेंद्र दुबे (महुआडाबर), बृजनाथ तिवारी (गोला) और बेद प्रकाश पांडेय (नवली गोला) सहित क्षेत्र के अन्य किसानों ने बताया कि मौसम का यह बदला हुआ रूप उनके लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
बारिश या ओलावृष्टि
किसानों के अनुसार, यदि मौसम साफ रहा तो अगले कुछ दिनों में तेजी से कटाई शुरू हो जाएगी, लेकिन यदि बारिश या ओलावृष्टि होती है तो खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। कई किसानों ने कहा कि पिछले वर्षों में भी इस समय मौसम ने दगा दिया था, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था।
कोई विशेष एडवाइजरी जारी नहीं
इस बीच प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अभी तक कोई विशेष एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, जिससे किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि मौसम की सटीक जानकारी और संभावित नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल आसमान में छाए काले बादल और तेज हवाएं किसानों के दिलों की धड़कनें बढ़ा रही हैं। अब सभी की नजरें मौसम के अगले रुख पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि किसानों की मेहनत रंग लाएगी या फिर प्रकृति का कहर उन पर भारी पड़ेगा।