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सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इंडिया गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग और संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने ऐसा बयान दिया है, जिसे सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि “बात सीट की नहीं, जीत की है।”
हाल के दिनों में कांग्रेस नेताओं की Mayawati से मुलाकात की कोशिशों ने यूपी की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया था। माना जाने लगा कि कांग्रेस, बसपा को भी विपक्षी गठबंधन में शामिल करने की संभावनाएं तलाश रही है। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया समेत कुछ नेता मायावती से मिलने पहुंचे थे, हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी।
इसी घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव का बयान काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा प्रमुख ने संकेत दिया है कि अगर कांग्रेस दूसरे विकल्प तलाशती है, तो समाजवादी पार्टी अकेले भी चुनाव लड़ने की स्थिति में खुद को तैयार मानती है।
2027 में ‘PDA सरकार’ बनाने के लिए हम उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं को पूरी तरह मुस्तैद रहने के लिए तैयार कर चुके हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारे साथ एलायंस में जो भी चुनाव लड़े, उसे चुनाव जीतने के लिए, हमारी बूथ लेवल तक की मजबूत संगठनात्मक शक्ति का पूरा… pic.twitter.com/6JkNGKGzqP
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 20, 2026
अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपना संगठनात्मक ढांचा मजबूत कर लिया है। बूथ स्तर तक पार्टी की तैयारी पूरी है और जो भी दल सपा के साथ आएगा, उसे इस नेटवर्क का फायदा मिलेगा।
उन्होंने बार-बार यह दोहराया कि गठबंधन का उद्देश्य सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि चुनाव जीतना होना चाहिए। उनके बयान को इस रूप में भी देखा जा रहा है कि यूपी में गठबंधन की राजनीति में सपा खुद को “बड़े भाई” की भूमिका में रखना चाहती है।
Samajwadi Party लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में इसी सामाजिक समीकरण और कांग्रेस के साथ गठबंधन ने भाजपा को उत्तर प्रदेश में कड़ी चुनौती दी थी।
अब सपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि गठबंधन में शामिल सहयोगी दल सिर्फ सीटों की मांग न करें, बल्कि जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक ताकत भी दिखाएं।
2027 विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करनी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव का बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी गठबंधन को लेकर दबाव की राजनीति नहीं चाहती और जीत की संभावना को प्राथमिकता देना चाहती है।
Location : Lucknow
Published : 22 May 2026, 1:18 PM IST