भारत-अमेरिका डील से उठे कई अहम सवाल, किसानों ने जताया डर, क्या बदल जाएगा देश की खेती का भविष्य?

भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चिंता जताई। राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर पांच मांगें की, जिसमें MSP कानूनी दर्जा और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात शामिल है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 6 February 2026, 4:25 PM IST
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Muzaffarnagar: भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर गहरी चिंता जताई है। मोर्चा का कहना है कि इस समझौते से भारतीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में किसानों के हितों की अनदेखी हुई, तो इसका सीधा असर देश की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें

राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह आलम के नेतृत्व में मोर्चा ने महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने पांच प्रमुख मांगें रखीं:

1. कृषि उत्पाद जैसे बादाम, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि को भविष्य के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से स्थायी रूप से बाहर रखने की संवैधानिक गारंटी।
2. डेरी उत्पाद जैसे चीज़, मिल्क पाउडर और प्रोटीन पर अमेरिका द्वारा दिए जाने वाले भारी सब्सिडी के कारण भारतीय किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकने की मांग।
3. किसी भी कृषि संबंधी व्यापार समझौते को लागू करने से पूर्व किसान संगठनों की सहमति अनिवार्य हो।
4. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा प्रदान किया जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद किसानों की आय सुरक्षित रहे।
5. छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय, जिससे वे वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हों।

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समझौते का आर्थिक प्रभाव

चौधरी शाह आलम ने बताया कि भारत से अमेरिका को जाने वाले कृषि माल पर 18% टैरिफ है, जबकि अमेरिका से भारत में आने वाले उत्पादों पर 0% टैक्स लगता है। इससे भारत के किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना है। शाह आलम ने चेतावनी दी कि यदि यह समझौता लागू हुआ, तो देश के किसान और अधिक आर्थिक दबाव में आ जाएंगे, जो आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है।

डेरी उत्पाद और वैश्विक दबाव

मोर्चा ने विशेष रूप से डेरी उत्पादों पर चिंता जताई। अमेरिका में डेरी उत्पादों पर भारी सब्सिडी दी जाती है। यदि ये उत्पाद भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर आयेंगे, तो छोटे किसानों और डेरी उत्पादकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

MSP और किसानों की सुरक्षा

ज्ञापन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने की मांग की गई है। यह कदम किसानों की आय को अंतरराष्ट्रीय दबाव से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक बताया गया। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं।

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किसान संगठनों की सहमति अनिवार्य

मोर्चा ने यह भी जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को लागू करने से पहले सभी किसान संगठनों की सहमति अनिवार्य हो। यह कदम किसानों के अधिकार और उनकी आय की रक्षा के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

चौधरी शाह आलम ने कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहें और वैश्विक व्यापार दबाव के बावजूद देश की कृषि प्रणाली प्रभावित न हो।

Location : 
  • Muzaffarnagar

Published : 
  • 6 February 2026, 4:25 PM IST

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