गाजियाबाद केस पर हाईकोर्ट सख्त: कहा- राजनीतिक आकाओं को खुश करने की कोशिश पुलिस की निष्पक्षता पर उठाती है सवाल

गजियाबाद के जमीन विवाद से जुड़े चर्चित मामले में हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं, कहा- राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए काम करते हैं अफसर, जिससे पुलिस की निष्पक्षता प्रभावित होती है। आइए जानें हाई कोर्ट ने क्या कहा..

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 7 June 2026, 6:27 PM IST
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Ghaziabad: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से तबादले, पोस्टिंग और पदोन्नति की प्रक्रिया राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित रही है। जिसका सीधा असर पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर पड़ता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार अफसर संविधान और कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय राजनीतिक आकाओं को खुश करने की मानसिकता से काम करते हैं। यह टिप्पणी गाजियाबाद के एक जमीन विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई।

80 दिन तक जेल में रही महिला, फिर कोर्ट पहुंचा मामला

मामला गाजियाबाद निवासी राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार से जुड़ा है। उनके खिलाफ पहले जमीन विवाद को लेकर धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने इस मामले में गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया। पुलिस का दावा था कि आरोपी संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे। इसी आधार पर गैंग चार्ट तैयार किया गया और परिवार के कई सदस्यों को आरोपी बना दिया गया।

इन आरोपियों में ललिता त्यागी का नाम भी शामिल था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जहां वह करीब 80 दिनों तक रही। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती दी।

गैंगस्टर एक्ट लगाने के आधार पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूरे मामले का रिकॉर्ड और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की समीक्षा की। अदालत को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि ललिता त्यागी किसी संगठित आपराधिक गिरोह का हिस्सा थी या उन्होंने किसी को भयभीत कर आर्थिक लाभ प्राप्त किया था।

कोर्ट ने कहा कि केवल आरोप लगा देने भर से किसी व्यक्ति को गैंगस्टर नहीं माना जा सकता। गैंगस्टर एक्ट जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त और ठोस आधार होना जरूरी है। एक सामान्य जमीन विवाद को सीधे गैंगस्टर एक्ट के दायरे में लाना कानून की मंशा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

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पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच करनी चाहिए। अदालत ने पाया कि तत्कालीन गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा ने गैंग चार्ट को मंजूरी देते समय पर्याप्त सावधानी नहीं बरती। कोर्ट ने कहा कि किसी भी अधिकारी को गंभीर कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करना चाहिए।

प्रशासनिक व्यवस्था पर भी जताई चिंता

फैसले में अदालत ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई बार अधिकारियों की नियुक्ति, तबादले और महत्वपूर्ण फैसले योग्यता के बजाय अन्य कारणों से प्रभावित होते दिखाई देते हैं। इससे प्रशासन की निष्पक्षता और जनता के विश्वास पर असर पड़ता है।

अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य लोगों को न्याय दिलाना है, इसलिए गिरफ्तारी, मुकदमे और अन्य कार्रवाई पूरी सावधानी तथा साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। बिना पर्याप्त जांच के किसी व्यक्ति को कठोर कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए।

गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई रद्द

हाईकोर्ट ने राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई पूरी कार्रवाई को रद्द कर दिया। साथ ही तत्कालीन पुलिस कमिश्नर को भविष्य में अधिक जिम्मेदारी, संतुलन और कानूनी सतर्कता के साथ निर्णय लेने की सलाह दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन और पुलिस की पहली जिम्मेदारी संविधान और कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से काम करना है। जिससे आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

Location :  Ghaziabad:

Published :  7 June 2026, 6:27 PM IST

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