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भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को गोरखपुर में आशा बहुओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में जुटीं आशा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण भी हो गया…
बकाया भुगतान पर बवाल
Gorakhpur: बकाया भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को गोरखपुर में आशा बहुओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में जुटीं आशा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण भी हो गया, जब आशा बहुओं ने आरोप लगाया कि महीनों से उनके मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन कर रहीं आशा बहुओं का कहना था कि वे गांव-गांव जाकर टीकाकरण, प्रसव सेवाएं और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन बदले में उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। उनका आरोप था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं, इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने सख्त रुख अपनाते हुए आशा कार्यकर्ताओं के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी का भुगतान वास्तव में लंबित है, तो उसके समर्थन में वैध बाउचर या दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक है। बिना प्रमाण के भुगतान का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीएमओ के अनुसार, धरने में शामिल कोई भी आशा कार्यकर्ता अपने बकाया भुगतान से जुड़ा ठोस दस्तावेज नहीं दिखा पाई और केवल मौखिक आरोप लगाए गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन सक्रिय हुआ और एसीएम द्वितीय राजू कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर उन्हें शांत कराया और स्पष्ट किया कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए विभागीय प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने आशा बहुओं से अपील की कि वे अपने दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें, ताकि शीघ्र कार्रवाई संभव हो सके।
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करीब कुछ घंटों तक चले इस प्रदर्शन के बाद, अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर आशा बहुएं धीरे-धीरे शांत हुईं और बिना कोई बाउचर प्रस्तुत किए धरना समाप्त कर वापस लौट गईं। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में भुगतान की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाती है और यदि कहीं कोई वास्तविक समस्या है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों और विभाग के बीच संवाद और समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है।