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गोरखपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन ने चार नए ट्रैफिक थाने खोलने का निर्णय लिया है। धर्मशाला, मोहद्दीपुर, बेतियाहाता और नौसढ़ क्षेत्रों में क्षेत्रवार निगरानी बढ़ाई जाएगी। अवैध पार्किंग और ई-रिक्शा की मनमानी पर सख्त कार्रवाई होगी।
गोरखपुर में ट्रैफिक पर बड़ा प्रहार
Gorakhpur: शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। लगातार बढ़ते जाम, अवैध पार्किंग और ई-रिक्शा की मनमानी से जूझ रहे शहर में अब चार नए ट्रैफिक थाने खोले जाएंगे।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, धर्मशाला, मोहद्दीपुर, बेतियाहाता और नौसढ़ में स्थापित होने वाले ये ट्रैफिक थाने क्षेत्रवार निगरानी को मजबूत करेंगे और जवाबदेही तय करेंगे। प्रशासन के अनुसार धर्मशाला ट्रैफिक थाना गोरखनाथ क्षेत्र की व्यवस्था संभालेगा।
मोहद्दीपुर थाना पिपराइच रोड और मेडिकल रोड की निगरानी करेगा। बेतियाहाता ट्रैफिक थाना घंटाघर और रुस्तमपुर इलाके को कवर करेगा, जबकि नौसढ़ ट्रैफिक थाना ट्रांसपोर्ट नगर और फल मंडी क्षेत्र की जिम्मेदारी उठाएगा। स्पष्ट है कि शहर के सबसे व्यस्त और जाम प्रभावित इलाकों को प्राथमिकता दी गई है।
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सबसे सख्त कार्रवाई अवैध पार्किंग के खिलाफ होगी। सड़क की बाईं ओर बेतरतीब खड़े वाहन अब सीधे कार्रवाई की जद में आएंगे। खासकर गोलघर, घंटाघर, मेडिकल रोड और ट्रांसपोर्ट नगर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। नियम तोड़ने वालों का चालान होगा, साथ ही क्रेन से वाहन उठाकर सीधे यार्ड भेज दिया जाएगा। इस संयुक्त अभियान में नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जीडीए की टीमें मिलकर काम करेंगी।
ई-रिक्शा संचालन को भी पूरी तरह से रेगुलेट किया जाएगा। अब ई-रिक्शा केवल निर्धारित रूट पर ही चल सकेंगे। चौराहों पर सवारी बैठाना-उतारना, बीच सड़क वाहन रोकना या बिना अनुमति रूट बदलना भारी पड़ेगा। बार-बार उल्लंघन करने वालों के परमिट निरस्त करने तक की कार्रवाई होगी।
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यार्ड प्रबंधन में भी बड़ा सुधार किया जाएगा। वर्षों से अव्यवस्थित ढंग से खड़ी जब्त गाड़ियों को व्यवस्थित स्थानों पर शिफ्ट कर पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि भविष्य की कार्रवाई प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
अधिकारियों का दावा है कि चार नए ट्रैफिक थानों के संचालन से क्षेत्रवार निगरानी मजबूत होगी और हर थाना प्रभारी अपने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए सीधे जिम्मेदार होगा। शहरवासियों की नजर अब इस बात पर है कि यह सख्ती धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है।