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सहजनवां तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भगवानपुर टोला भखरा व भलेंद्री में बंधा टूटने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। अचानक हुए जलभराव से दर्जनों किसानों की कई एकड़ खड़ी फसल जलमग्न हो गई, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
गोरखपुर में किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
Gorakhpur: सहजनवां तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भगवानपुर टोला भखरा व भलेंद्री में बंधा टूटने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। अचानक हुए जलभराव से दर्जनों किसानों की कई एकड़ खड़ी फसल जलमग्न हो गई, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
पीड़ित किसानों ने तहसील पहुंचकर तहसीलदार सहजनवां राकेश कन्नौजिया को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों का आरोप है कि गीडा सेक्टर-27 में स्थित एक फैक्ट्री द्वारा नया ट्यूबवेल बनवाया जा रहा है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा ट्यूबवेल के पानी को स्टोर करने के लिए बनाए गए बंधे के टूटने से आसपास के खेतों में पानी भर गया। देखते ही देखते खेत तालाब में तब्दील हो गए और धान, गेहूं व सब्जियों की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। किसानों का कहना है कि इस नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है, क्योंकि फसल ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।
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पीड़ित किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते निर्माण कार्य और जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाती, तो यह स्थिति उत्पन्न न होती। किसानों ने मांग की कि फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। साथ ही, प्रभावित किसानों को फसल क्षति का आकलन कर तत्काल मुआवजा दिया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में शिवशंकर दुबे, प्रमोद, जनार्दन सिंह, मानवेंद्र सिंह, रवि प्रताप, विनय सिंह सहित अनेक किसान मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र राहत नहीं मिली तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस संबंध में तहसीलदार राकेश कन्नौजिया ने बताया कि किसानों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागों से जांच कराकर फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद भी अब निगाहें कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते मुआवजा और स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र में किसानों का आक्रोश और बढ़ सकता है।