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गोरखपुर में 2014 के गैर-इरादतन हत्या मामले में एडीजे-08 कोर्ट ने आरोपी हरिनाथ को 7 साल की सजा और 36 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। यह कार्रवाई ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत की गई।
Gorakhpur Court
Gorakhpur: गोरखपुर में एक पुराने आपराधिक मामले में आखिरकार न्याय का पहिया घूम ही गया। साल 2014 में बेलघाट इलाके में हुई गैर-इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने साफ कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं है।
एडीजे-08 कोर्ट का फैसला
न्यायालय एडीजे-08 गोरखपुर ने बेलघाट थाना क्षेत्र के छितौना गांव निवासी हरिनाथ पुत्र राममूरत को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाया। कोर्ट ने उसे 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 36,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
ऑपरेशन कनविक्शन का असर
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत हुई है। इस अभियान का मकसद है कि गंभीर अपराधों में जल्द से जल्द सजा सुनिश्चित की जाए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने इस केस की लगातार निगरानी की। पुलिस ने मजबूत साक्ष्य और गवाहों के आधार पर कोर्ट में ठोस दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी
इस मामले में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) अतुल कुमार शुक्ला और धर्मेंद्र कुमार दूबे की भूमिका अहम रही। दोनों ने सुनवाई के दौरान साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पेश किया। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी की संलिप्तता पूरी तरह प्रमाणित होती है।
कानून-व्यवस्था के लिए अहम संदेश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अपराधियों के लिए साफ संदेश है कि कानून से बचना मुश्किल है। गोरखपुर पुलिस पुराने और लंबित मामलों की समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता पर निपटा रही है। “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और अपराधियों में कानून का डर बना रहे।