फर्जी सेना भर्ती के नाम पर ठगी का खेल! पूरे नेटवर्क की जांच की मांग, भाकियू ने एसपी को सौंपा ज्ञापन

मैनपुरी के थाना एलाऊ में दर्ज फर्जी सेना भर्ती और सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी के मामले में भारतीय किसान यूनियन (बलराज) ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन ने साइबर, बैंकिंग रिकॉर्ड, एफएसएल जांच और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 1 August 2026, 12:26 PM IST
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Mainpuri: सेना में भर्ती कराने के नाम पर युवाओं के सपनों से खिलवाड़ और लाखों रुपये की कथित ठगी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। फर्जी मेडिकल एडमिट कार्ड, नकली ज्वाइनिंग लेटर और सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवाओं को जाल में फंसाने के आरोपों के बीच भारतीय किसान यूनियन (बलराज) खुलकर मैदान में उतर आई है। संगठन ने इस पूरे मामले में सिर्फ नामजद आरोपियों तक कार्रवाई सीमित न रखने की मांग करते हुए पूरे नेटवर्क की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि जांच हर पहलू से हुई तो इस फर्जी भर्ती गिरोह से जुड़े कई और चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।

एसपी को सौंपा गया ज्ञापन

शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के मंडल अध्यक्ष मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में थाना एलाऊ में दर्ज अपराध संख्या 61/2025 का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। संगठन का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर कथित रूप से लाखों रुपये की ठगी की गई।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे ठगी का आरोप

ज्ञापन के अनुसार दर्ज मुकदमे में फर्जी सेना भर्ती, फर्जी मेडिकल एडमिट कार्ड, नकली नियुक्ति पत्र और ज्वाइनिंग लेटर तैयार कर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा दिया गया। आरोप है कि इसी बहाने उनसे लाखों रुपये वसूले गए। संगठन का कहना है कि बेरोजगारी के दौर में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवा आसानी से ऐसे गिरोहों के निशाने पर आ जाते हैं।

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साइबर और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की मांग

भारतीय किसान यूनियन (बलराज) ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच केवल बयानों तक सीमित न रखी जाए। संगठन ने बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी गहन जांच कराने की मांग उठाई है।

एफएसएल और साइबर विशेषज्ञों से जांच कराने पर जोर

संगठन ने फर्जी दस्तावेजों की सत्यता की जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) और साइबर विशेषज्ञों की मदद लेने की भी मांग की है। उनका कहना है कि आज के समय में अधिकतर अपराध डिजिटल माध्यमों से जुड़े होते हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है।

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नए नाम सामने आए तो हो सख्त कार्रवाई

भारतीय किसान यूनियन (बलराज) ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी बिना किसी भेदभाव के कानूनी कार्रवाई की जाए। किसी भी आरोपी को केवल इसलिए राहत न मिले कि उसका नाम शुरुआती एफआईआर में शामिल नहीं था।

Location :  Mainpuri

Published :  1 August 2026, 12:26 PM IST

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