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देवरिया में अब्दुल शाह गनी बाबा की मजार पर लगने वाले सालाना उर्स मेले को जिला प्रशासन ने एसडीएम कोर्ट के आदेश के बाद रोक दिया है। मजार और कब्रिस्तान को सरकारी व बंजर भूमि घोषित किया गया था। उर्स की अनुमति न मिलने से क्षेत्र में तनाव की आशंका के चलते कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
सालाना उर्स को नहीं मिली अनुमति
Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में अब्दुल शाह गनी बाबा की मजार पर लगने वाले सालाना उर्स मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सदर कोतवाली क्षेत्र में स्थित इस मजार पर तीन और चार जनवरी को आयोजित होने वाले उर्स मेले पर प्रशासन ने रोक लगा दी है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, प्रशासनिक आदेश के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई थानों की पुलिस फोर्स को अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है।
दरअसल, यह मामला देवरिया सदर कोतवाली क्षेत्र के ओवरब्रिज के नीचे स्थित एक मजार और कब्रिस्तान से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। एसडीएम सदर देवरिया श्रुति शर्मा की अदालत ने कुछ माह पहले इस भूमि को सरकारी और बंजर घोषित किया था। कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि यह मजार और कब्रिस्तान अवैध रूप से सरकारी भूमि पर बना हुआ है और इसे वैध धार्मिक स्थल का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते लगभग 25 वर्षों से अब्दुल शाह गनी बाबा की मजार पर हर साल तीन और चार जनवरी को उर्स मेले का आयोजन किया जाता रहा है। इस मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु, जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल रहते हैं, मजार पर चादर चढ़ाने और मन्नतें मांगने पहुंचते रहे हैं। यह उर्स स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था से जुड़ा एक बड़ा आयोजन माना जाता था।
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वर्ष 2025 के बाद इस मजार को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। एक पक्ष ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई कि यह भूमि सरकारी है और ओवरब्रिज के पास अवैध रूप से निर्माण किया गया है। इसी के आधार पर मजार और कब्रिस्तान को हटाने की मांग की गई। इस मामले में जिला प्रशासन ने जांच करवाई और अंततः एसडीएम कोर्ट ने इसे सरकारी एवं बंजर भूमि घोषित कर दिया।
वहीं, मजार से जुड़े दूसरे पक्ष ने जिला प्रशासन से लेकर लखनऊ और इलाहाबाद तक न्यायालयों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें किसी स्तर पर राहत नहीं मिल सकी।
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एसडीएम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन ने वर्ष 2026 में होने वाले उर्स मेले की अनुमति नहीं दी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मजार परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मौके पर क्षेत्राधिकारी (सीओ), सदर कोतवाल सहित कई थानों की पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस द्वारा लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
उर्स पर रोक लगाए जाने से इस्लामिक समुदाय के प्रबुद्ध वर्ग में नाराजगी और आहत भावनाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि, जिला प्रशासन का कहना है कि वह पूरी तरह कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।