लीलापुर सीएचसी का पर्दाफाश: डॉक्टर साहब की लगी एडवांस हाजिरी, बिना इलाज लौट रहे मरीज, स्वास्थ्य सिस्टम पूरी तरह फेल

देवरिया के लीलापुर सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हैं। औचक निरीक्षण में डॉक्टर की एडवांस हाजिरी, बंद कमरे और ऑक्सीजन-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी मिली है। जर्जर भवन में इलाज के अभाव में ग्रामीण मरीज निजी केंद्रों पर जाने को मजबूर हैं।

Updated : 17 July 2026, 3:32 PM IST
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Deoria: उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जनपद के बैतालपुर ब्लॉक स्थित लीलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बदहाली का एक बड़ा मामला सामने आया है। डाइनामाइट न्यूज़ की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आईं, जिससे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुल गई है।

ताले में बंद कमरे और डॉक्टरों की अनुपस्थिति

निरीक्षण के दौरान अस्पताल के कई कमरों में ताला लटका मिला। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अस्पताल में अक्सर सुबह के समय न तो कोई डॉक्टर मिलता है और न ही नर्स। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जांच और इलाज के लिए मजबूरन निजी केंद्रों (प्राइवेट सेंटरों) का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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अग्रिम हाजिरी का अनोखा खेल

कागजों पर इस सीएचसी में कुल आठ कर्मचारियों की नियुक्ति है- जिसमें दो मेडिकल ऑफिसर, एक वार्ड बॉय, एक स्टाफ नर्स, एक स्वीपर, एक डेंटल कर्मी, एक पैथोलॉजी कर्मी और एक एक्स-रे रेडियोलॉजिस्ट शामिल हैं। लेकिन हकीकत में ड्यूटी को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। जब टीम ने स्टाफ उपस्थिति रजिस्टर की जांच की, तो एक मेडिकल ऑफिसर की 'एडवांस' (अग्रिम) हाजिरी लगी हुई मिली। इस बारे में जब संबंधित चिकित्सक शिवम कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा कि उन्हें दो जगहों पर ड्यूटी करनी पड़ती है, इसलिए वे पहले ही हस्ताक्षर कर देते हैं।

संसाधनों का टोटा: न ऑक्सीजन, न पानी

अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स ने बताया कि यहाँ प्रसव (डिलीवरी) के मरीज तो आते हैं, लेकिन उनके इलाज के लिए न तो ऑक्सीजन है, न ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और न ही पर्याप्त बेड। आवश्यक संसाधनों की कमी को लेकर कई बार विभाग को पत्र लिखे गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, डेंटल विभाग के कर्मी ने माना कि दंत चिकित्सा के ज्यादातर उपकरण खराब पड़े हैं, जिसके कारण मरीजों को बिना इलाज सिर्फ सलाह देकर लौटा दिया जाता है। हद तो तब हो गई जब स्वीपर ने बताया कि अस्पताल में पानी तक की व्यवस्था नहीं है और उसे सफाई के लिए बाहर से पानी लाना पड़ता है।

जर्जर भवन और गंदगी का अंबार

अस्पताल की इमारत खुद बीमार हो चुकी है। जगह-जगह गंदगी, टूटी कुर्सियां, खराब पंखे और अव्यवस्थित बेड फैले हुए हैं। बरसात के मौसम में छत से पानी टपक रहा है, जो कैमरे में भी कैद हुआ है। यह जर्जर भवन कभी भी किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है।

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फाइलों में सुधार, धरातल पर बदहाली

लीलापुर सीएचसी की यह बदहाली साफ दर्शाती है कि सरकार के बड़े-बड़े दावे धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप हैं। मेडिकल प्रशासन की लापरवाही के कारण गरीब मरीज परेशान हैं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी हमेशा की तरह फाइलों में ही दबाकर बंद कर दिया जाएगा।

Location :  Deoria

Published :  17 July 2026, 3:32 PM IST

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