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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक भवन स्थित समिति कक्ष में आयोजित की गई।
DDU Gorakhpur University के नाम में बड़ा बदलाव
Gorakhpur: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक भवन स्थित समिति कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। इस बैठक में विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
कार्यपरिषद ने स्ववित्तपोषित विभागों में सहायक आचार्य (संविदा) की नियुक्ति के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। स्वीकृत प्रस्ताव के अंतर्गत कुल 23 सहायक आचार्यों की नियुक्ति की जाएगी। विभागवार स्वीकृत पदों में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में 12 पद, फार्मेसी में 5 पद, कृषि में 4 पद तथा बी.कॉम. (बैंकिंग एवं इंश्योरेंस) में 2 पद शामिल हैं।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि इन नियुक्तियों से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में शिक्षण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए निरंतर प्रयासरत है और यह निर्णय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।
बैठक में शासन के निर्देशों के अनुरूप ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में भी कार्यपरिषद को अवगत कराया गया। यह पहल विश्वविद्यालय में उद्योग, प्रबंधन और व्यावहारिक अनुभव से जुड़े विशेषज्ञों को अकादमिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय के लोगो में विश्वविद्यालय के नाम के लेखन में महत्वपूर्ण परिवर्तन को भी मंजूरी दी। अब विश्वविद्यालय का नाम DDU Gorakhpur University के स्थान पर Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University लिखा जाएगा। यह बदलाव विश्वविद्यालय की आधिकारिक पहचान को और अधिक स्पष्ट एवं सुसंगत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
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बैठक में सम्बद्धता समिति के निर्णय के क्रम में 12 महाविद्यालयों को 28 पाठ्यक्रमों के लिए स्थायी सम्बद्धता प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा, एक महाविद्यालय को एक वर्ष का अस्थायी विस्तार भी स्वीकृत किया गया। यह निर्णय उच्च शिक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर, कार्यपरिषद की यह बैठक विश्वविद्यालय के अकादमिक विकास, प्रशासनिक सुधार और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को नई दिशा देने वाली साबित हुई।