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उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पिछले कई महीनों से राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है।अब इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा फैसला लिया है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में बड़ी खबर
Dehradun: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता के भारी आक्रोश और अंकिता के माता-पिता की मांग को स्वीकार करते हुए इस पूरे प्रकरण की CBI जांच की संस्तुति दे दी है। विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा था, इसके लिए पूरे राज्य में प्रदर्शन किए जा रहे थे।
वहीं, सीएम धामी ने एक वीडियो जारी कर जानकारी देते हुए बताया कि अंकिता के माता-पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। बीते बुधवार को ही मुख्यमंत्री ने अंकिता के माता- पिता को देहरादून बुलाया था, जहां पर परिवार ने सीएम से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी।
सीएम धामी के ऐलान के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा की सीबीआई जांच की सिफारिश कर सरकार ने माना है कि अतीत में उनसे गलती हुई है।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने बताया कि अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात के दौरान उन्होंने CBI जांच कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद सरकार ने इस प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति देने का निर्णय लिया।
उधर, सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार मानती है कि शुरुआती जांच में गलतियां हुई थीं। उन्होंने इसे संयुक्त संघर्ष और जनता के दबाव की जीत बताया।
वहीं, उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी एक संवेदनशील नेता हैं और उन्होंने माता-पिता से किए गए वादे के अनुसार सीबीआई जांच को मंजूरी दी है।
हालांकि इस फैसले के बाद भी विपक्ष का हमला थमा नहीं है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि सिर्फ सीबीआई जांच की घोषणा काफी नहीं है।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह वीआईपी कौन था, जिसकी चर्चा इस मामले में बार-बार सामने आई? साथ ही यह भी पूछा कि घटना वाली रात रिजॉर्ट पर बुलडोजर किसके आदेश पर चलाया गया।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक न्याय अधूरा है।