हिंदी
मैनपुरी जिले में खेत में लगे छायादार पेड़ को काटने का विरोध करना गरीब परिवार को भारी पड़ गया। आरोप है कि दबंगों ने महिला, उसकी बेटी और बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक मैनपुरी से शिकायत करते हुए परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद से दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां खेत में लगे छायादार पेड़ को काटने का विरोध करने पर एक गरीब महिला और उसके बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। यह मामला थाना बिछवां क्षेत्र के ग्राम बुर्जी चक सहारा, तहसील भोगांव का है।
पीड़िता श्रीमती मुन्नी देवी पत्नी ग्रीशचंद्र ने बताया कि वह अपने खेत गाटा संख्या 729 में वर्षों से खेती कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। खेत में एक पुराना छायादार पेड़ लगा हुआ है, जिसे गांव के ही कुछ दबंग जबरन काटना चाहते थे।
पीड़िता के अनुसार 20 फरवरी 2026 को सोबरन सिंह पुत्र लल्लू सिंह, उसके बेटे सचिन और संगम खेत में घुस आए और बिना अनुमति पेड़ काटने लगे। जब मुन्नी देवी और उनकी बेटी मोहिनी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने पेड़ की लकड़ियों से दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
महिला का आरोप है कि सोबरन सिंह ने कुल्हाड़ी से हमला कर जान से मारने की नीयत दिखाई। किसी तरह उनकी बेटी ने बीच-बचाव कर उनकी जान बचाई, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। आरोपियों ने महिला को जमीन पर गिराकर दबाने का भी प्रयास किया और खुलेआम धमकी दी कि दोबारा विरोध किया तो पूरे परिवार को जान से मार देंगे।
घटना यहीं नहीं रुकी। पीड़िता ने बताया कि मारपीट के बाद उनका बेटा शशिकांत जब स्कूल से घर लौट रहा था, तो आरोपियों ने उसे रास्ते में घेर लिया और उसके साथ भी मारपीट की। बच्चे के शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हुए और डायल 112 पर सूचना दी गई, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद से पीड़ित परिवार बेहद डरा हुआ है और गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
पीड़िता मुन्नी देवी ने पुलिस अधीक्षक मैनपुरी को शिकायती पत्र सौंपकर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने, सख्त कानूनी कार्रवाई करने और परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
जानिये फरवरी में घूमने की बेस्ट जगहें
इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में दबंगों के हौसले और कमजोर वर्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि पीड़ित परिवार को कब न्याय और सुरक्षा मिलती है।