सोत नदी पर मंडराया संकट: ककराला पालिका की करतूत से नदी किनारे लग रहे कचरे के अंबार, भड़के ग्रामीणों की बड़ी चेतावनी

बदायूं में सोत नदी को पुनर्जीवित करने के दावों की पोल खुल गई है। ककराला नगर पालिका द्वारा नदी किनारे कचरा फेंके जाने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्राम प्रधान की शिकायत पर ADM ने कड़े आदेश दिए हैं, वहीं ग्रामीणों ने कर्मचारियों को बंधक बनाने की चेतावनी दी है।

Updated : 4 August 2026, 2:54 PM IST
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Budaun: एक तरफ शासन और प्रशासन सोत नदी के पुनरुद्धार के लिए लंबी-चौड़ी योजनाएं बना रहा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार संस्थाएं ही इस मुहिम को पलीता लगाने में जुटी हैं। बदायूं जिले के ककराला नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां नदी को पुनर्जीवित करने के दावों के बीच रोजाना नगर का सारा कचरा सोत नदी के किनारे खुलेआम डंप किया जा रहा है। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण नदी का अस्तित्व तो खतरे में पड़ ही रहा है, साथ ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी भारी खतरा मंडराने लगा है।

बिना रास्ते का लाखों का डंप यार्ड

इस पूरे मामले की जब परतें खुलीं, तो नगर पालिका की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए। जांच में सामने आया कि पालिका प्रशासन ने नदी के समीप ही लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से एक कचरा डंप यार्ड का निर्माण कराया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस यार्ड तक पहुंचने के लिए कोई भी पक्का रास्ता नहीं बनाया गया।

योजना तैयार करते समय जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। नतीजतन, जब कचरे से भरी ट्रालियां वहां तक नहीं पहुंच पाईं, तो कर्मचारियों ने शॉर्टकट का रास्ता अपनाया और सारा कचरा सीधे सोत नदी के किनारे उड़ेलना शुरू कर दिया। आज प्रशासनिक लापरवाही की यह सजा सीधे तौर पर नदी और आसपास के ग्रामीण भुगत रहे हैं।

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प्रधान की शिकायत पर जागा प्रशासन

नदी किनारे लग रहे कचरे के अंबार और उससे उठ रही दुर्गंध से तंग आकर भोजपुर गांव के ग्राम प्रधान ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने इस संबंध में एडीएम (ADM) प्रशासन को एक लिखित शिकायत सौंपी।

शिकायत में मुख्य रूप से यह उठाया गया कि ककराला पालिका के कर्मचारी रोजाना ट्रालियों में कचरा भरकर सीधे नदी के किनारे फेंक रहे हैं। वर्तमान में नदी का जलस्तर पहले से ही काफी कम है, ऐसे में इस कचरे के कारण भीषण बदबू, मक्खी-मच्छर और अन्य कीड़े-मकौड़े पनप रहे हैं, जिससे महामारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडीएम प्रशासन ने ककराला पालिका को तत्काल प्रभाव से सारा कचरा वहां से हटवाने और भविष्य में नदी के किनारे भूलकर भी कचरा न डालने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: चेतावनी- "कर्मचारियों को बनाएंगे बंधक"

पालिका की इस मनमानी से भोजपुर और आसपास के गांवों के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका ने कचरा डालना बंद नहीं किया, तो अगली बार नदी किनारे कचरा गिराने आने वाले पालिका कर्मचारियों को बंधक बना लिया जाएगा।

गांव वालों का यह भी कहना है कि ठीक एक साल पहले भी इसी मुद्दे पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया था। तब प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करने का पूरा आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ महीने बीतते ही स्थिति फिर से जस की तस हो गई।

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क्या कागजों तक ही सिमट कर रह जाएंगी योजनाएं?

सोत नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने और उसे पुनर्जीवित करने के लिए शासन स्तर पर लगातार बैठकें और तमाम अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन जब एक जिम्मेदार निकाय ही खुद नदी को कचरे के ढेर में तब्दील करने पर आमादा हो, तो सिस्टम की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है।

फिलहाल, एडीएम के सख्त आदेश के बाद ककराला पालिका प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पालिका प्रशासन नदी किनारे से कचरा हटाने और उस नाकारा डंप यार्ड तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता बनाने की दिशा में आखिरकार कब तक ठोस कदम उठाता है।

Location :  Budaun

Published :  4 August 2026, 2:54 PM IST

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