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बदायूँ के राजकीय हाईस्कूल सीर जयलाल में चपरासी पद की भर्ती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक लंबे समय से सेवा देने वाले उम्मीदवार की अनदेखी ने खड़ा किया संशय, चयन प्रक्रिया और प्रशासन की पारदर्शिता पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
प्रार्थी ने भर्ती रद्द कराने की मांग की (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Budaun: राजकीय हाईस्कूल सीर जयलाल, समरेर जनपद बदायूँ में चपरासी पद पर हुई भर्ती को लेकर एक व्यक्ति ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रार्थी अनूप कुमार ने प्रशासन के खिलाफ प्रार्थना पत्र देकर इस भर्ती को रद्द कर पुनः चयन कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और उनके अनुभव व योग्यताओं के बावजूद किसी अन्य व्यक्ति का चयन किया गया।
अनूप कुमार ने बताया कि वह वर्ष 2016 से राजकीय हाईस्कूल सीर जयलाल, समरेर जनपद बदायूँ में चपरासी/सफाई कर्मी के पद पर अस्थाई तौर पर सेवाएँ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस भर्ती के लिए समय से आवेदन किया था और सभी मापदण्डों व योग्यता को पूरा किया था, फिर भी उनका चयन नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों और मानकों की अनदेखी की गई और चयन पूरी तरह मनमानी तरीके से किया गया।
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प्रार्थी ने अपने प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश सरकार के शासनादेश के अनुसार सेवा नियोजन कार्यालय के तहत मैनपॉवर उपलब्ध कराकर भर्ती की जाती है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। उनका कहना है कि नियमों का पालन किए बिना ही किसी अन्य व्यक्ति का चयन कर लिया गया, जिससे उन्हें और अन्य योग्य उम्मीदवारों को अनुचित तरीके से वंचित किया गया।
अनूप कुमार ने इस मामले में कहा, "मेरी सेवा को नजरअंदाज किया गया है। मैंने वर्ष 2016 से इस स्कूल में काम किया है और सभी कार्यों में तत्पर रहा हूँ। इसके बावजूद किसी अन्य व्यक्ति का चयन किया गया, जो पूरी तरह अनुचित है। मैं इस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नियमों के अनुसार योग्य उम्मीदवार का चयन कराने की मांग करता हूँ।"
प्रार्थी ने प्रार्थना पत्र में प्रशासन से अनुरोध किया है कि भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर पुनः चयन कराए जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियमों का पालन कर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाता, तो इस तरह की असमंजसपूर्ण स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सरकार से अपील की है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट नियमों और मानकों का पालन कराया जाए ताकि योग्य उम्मीदवारों के हक की रक्षा हो सके।
इस मामले में स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि, प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के बाद संभावित जांच की संभावना जताई जा रही है। शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता का पूरा ध्यान रखा जाता है, लेकिन यदि किसी ने प्रक्रिया के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराई है, तो उसका निराकरण आवश्यक होगा।
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स्थानीय शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ भी इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और उन्होंने कहा है कि वे प्रार्थी के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि भर्ती में पारदर्शिता और योग्यता का सही मूल्यांकन ही कर्मचारियों के विश्वास को मजबूत करेगा और भविष्य में किसी तरह की मनमानी को रोका जा सकेगा।