‘आरक्षण का राजनीतिकरण बंद हो’: बसपा प्रमुख की दो टूक, आरएसएस को दी संविधान का सम्मान करने की नसीहत

आरक्षण का राजनीतिक लाभ न उठाया जाए। बसपा प्रमुख ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की चर्चा को संविधान के विरुद्ध बताते हुए आरएसएस को समतामूलक समाज के निर्माण में सहयोग की सलाह दी है।

Updated : 9 August 2026, 10:42 AM IST
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Lucknow: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने देश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के आरक्षण को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। पार्टी प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक या आर्थिक लाभ का नहीं, बल्कि इन वर्गों के आत्म-सम्मान, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण व संवेदनशील मामला है। सदियों से जातिगत भेदभाव, शोषण और अत्याचार का शिकार रहे एससी और एसटी समाज के लिए यह जीवनयापन का एक बुनियादी सवाल है। वर्तमान समय में भी जातिवादी द्वेष और प्रताड़ना में कमी नहीं आई है, जिसके चलते आरक्षण की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

क्रीमी लेयर की चर्चा को बताया अनुसंविधानिक और अनुचित

बसपा प्रमुख ने आरक्षण के दायरे में 'क्रीमी लेयर' लागू करने की किसी भी चर्चा को पूरी तरह से अनुचित करार दिया है। उनके अनुसार, इस तरह की बातें करना बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के विरुद्ध है। उन्होंने अपील की है कि देश और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस पर बिना किसी अनदेखी के पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अमल किया जाना चाहिए, ताकि शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

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आरएसएस प्रमुख के बयान पर कड़ी आपत्ति और संवैधानिक उद्देश्य

बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि "आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्थियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिए।"

बसपा प्रमुख ने इसे आरएसएस की जातिवादी सोच बताया है जिससे केवल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ पूरे हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक उद्देश्यों की भारी अवहेलना होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण मूल रूप से सदियों से पीड़ित और उपेक्षित लोगों को समता व समानता का संवैधानिक और कानूनी अधिकार देने का जरिया है। इसे केवल आर्थिक उन्नति से नहीं आँका जा सकता, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर स्तर पर आज भी बरकरार है।

अदालती पैरवी और सरकारों की भूमिका पर जोर

सरकार की भूमिका पर बात करते हुए कहा गया है कि केंद्र में अब तक रही सभी सरकारें जमीनी हकीकत से पूरी तरह वाकिफ हैं। अगर वर्तमान सरकार वाजिब तर्कों के साथ अदालतों में प्रभावी पैरवी करके एससी और एसटी समाज को क्रीमी लेयर के दायरे से दूर रखने में सफल होती है, तो यह कदम पूरी तरह उचित और संवैधानिक होगा। अक्सर सरकारों के लचर रवैये और कमजोर कानूनी पैरवी के कारण ही अदालतें 'सामाजिक परिवर्तन' से जुड़े मामलों में न्याय देने से चूक जाती हैं।

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बसपा प्रमुख ने आरएसएस को नसीहत दी है कि वह बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान का पूरा सम्मान करे। आरक्षण को लेकर राजनीति करना तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

Location :  Lucknow

Published :  9 August 2026, 10:42 AM IST

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