UGC गाइडलाइन पर भागवत का संदेश: कानून मानें लेकिन, गलत हो तो बदलें

लखनऊ में सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने UGC गाइडलाइन पर कहा कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए, और यदि कोई कानून गलत लगे तो उसे बदलने का लोकतांत्रिक तरीका अपनाना चाहिए। उन्होंने जातीय विवादों से ऊपर उठकर सामाजिक समन्वय, सहयोग और कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की बात कही।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 18 February 2026, 6:25 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने UGC गाइडलाइन पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का पालन करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। यदि किसी कानून पर असहमति है तो उसे बदलने के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ते मौजूद हैं।

भागवत ने कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की अपनी राय हो सकती है, लेकिन समाज में टकराव की जगह संवाद होना चाहिए। उनके मुताबिक संघर्ष से नहीं, बल्कि समन्वय से ही समाज आगे बढ़ता है। उन्होंने जोर दिया कि “जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुककर उठाना होगा” और समाज में अपनेपन की भावना मजबूत करनी होगी।

सामाजिक सद्भाव और समन्वय पर जोर

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जातियां समाज में विवाद का कारण नहीं बननी चाहिए। यदि समाज में पारस्परिक विश्वास और सहयोग का माहौल बनेगा तो कई समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने बस्ती स्तर पर नियमित सामाजिक सद्भाव बैठकों की आवश्यकता बताई ताकि गलतफहमियां दूर हों और रूढ़ियों पर खुलकर चर्चा हो सके।

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भागवत ने कहा कि भारत के पास दुनिया की कई समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है और निकट भविष्य में भारत वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समाज की “सज्जन शक्ति” से आगे आकर कमजोर और वंचित वर्गों की मदद करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ वैश्विक शक्तियां भारत की सामाजिक सद्भावना को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती हैं, इसलिए आपसी अविश्वास खत्म करना और एक-दूसरे के दुख-दर्द में शामिल होना जरूरी है।

जनसंख्या, मतांतरण और घुसपैठ पर चिंता

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी समाज में औसत जन्म दर तीन से कम हो जाती है तो भविष्य में वह कमजोर हो सकता है। इस विषय पर परिवारों, विशेषकर नवदंपतियों को जागरूक करने की जरूरत है।

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उन्होंने कथित जबरन मतांतरण पर रोक लगाने और “घर वापसी” की प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही। इसके साथ ही घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” की नीति अपनाने की जरूरत बताई और कहा कि अवैध घुसपैठियों को रोजगार नहीं मिलना चाहिए।

भागवत ने स्पष्ट किया कि समाज को किसी से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। उनके अनुसार संगठित और सशक्त समाज ही राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की नींव मजबूत कर सकता है।

Location : 
  • Lucknow

Published : 
  • 18 February 2026, 6:25 AM IST

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