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उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर राज्य में आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिये हैं। वेटिंग अफसर को भी नियुक्ति दे दी गई है। पढ़ें पूरी ख़बर
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी. हेकाली झिमोमी (Image Source: Google)
Lucknow: उत्तर प्रदेश शासन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के दायित्वों में फेरबदल किया है। आदेश के तहत प्रमुख सचिव पद पर नई नियुक्ति की गई है, जबकि मौजूदा अधिकारी को उस पद से अवमुक्त कर दिया गया है। इस निर्णय को विभागीय कार्यों की गति बढ़ाने और जिम्मेदारियों के बेहतर बंटवारे के रूप में देखा जा रहा है।
1996 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी. हेकाली झिमोमी को प्रमुख सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नियुक्त किया गया है। वह फिलहाल प्रतीक्षारत चल रही थीं और इससे पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। केंद्र सरकार में अतिरिक्त सचिव के रूप में भी उनकी तैनाती रह चुकी है।
झिमोमी को प्रशासनिक दक्षता और नीतिगत समझ के लिए जाना जाता है। उनकी नियुक्ति से राज्य में पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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अब तक प्रमुख सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा पंचायती राज विभाग का दायित्व संभाल रहे अनिल कुमार-III को वन विभाग के पद से अवमुक्त कर दिया गया है। हालांकि वे पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव बने रहेंगे और अब पूरी तरह इसी विभाग पर फोकस करेंगे।
उनके कार्यकाल में वन विभाग के साथ पंचायतों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता और ग्रामीण स्तर पर वन संरक्षण जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा मिला था। अब पंचायत चुनाव की तैयारियों को देखते हुए उन्हें एकल जिम्मेदारी दी गई है ताकि चुनावी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न कराई जा सके।
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वन एवं पर्यावरण विभाग राज्य में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान, वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति और जैव विविधता संरक्षण जैसी योजनाएं संचालित करता है। झिमोमी की तैनाती से इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
प्रमुख सचिव कार्मिक एवं नियुक्ति एम. देवराज के अनुसार दोनों अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपने-अपने दायित्वों का कार्यभार संभालेंगे। शासन का मानना है कि इस बदलाव से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और नीति निर्माण के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कामकाज को मजबूती मिलेगी।
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