शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं! अमित शाह के बयान के बाद UCC पर मुस्लिम जमात का कड़ा रुख, दी बड़ी चेतावनी

एक कानून और उससे जुड़े कई सवाल। बयान सामने आया तो बहस तेज हो गई। अब धार्मिक अधिकारों से लेकर विरोध प्रदर्शन के तरीके तक पर एक प्रमुख मुस्लिम संगठन की ओर से अपनी बात रखी गई है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 19 September 2026, 2:42 PM IST
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Bareilly: उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बयान जारी किया है। यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता को लेकर दिए गए बयान के बाद सामने आई है। मौलाना ने कहा कि UCC को लेकर मुस्लिम संगठनों की अपनी चिंताएं हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय इसे शरीयत से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने वाले कानून के रूप में देखता है।

अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों का दिया हवाला

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले संबंधित राज्य में रहने वाले अलग-अलग समुदायों की राय को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में सामाजिक, धार्मिक और जनजातीय परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं।

ऐसे में किसी एक राज्य में तैयार किए गए UCC मॉडल को सीधे दूसरे राज्यों में लागू करना उचित नहीं होगा। मौलाना के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में स्थानीय स्तर पर कई तरह की परंपराएं और व्यवस्थाएं लंबे समय से चली आ रही हैं। इसलिए कानून बनाते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर भी जताई चिंता

अपने बयान में मौलाना ने पूर्वोत्तर राज्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नागालैंड, मिजोरम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में कई जनजातीय समुदायों की अपनी पारंपरिक व्यवस्थाएं हैं। उनका कहना है कि इन समुदायों को संविधान के तहत कुछ विशेष अधिकार और संरक्षण मिले हुए हैं।

ऐसे में UCC लागू करने के दौरान इन संवैधानिक प्रावधानों और स्थानीय व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग समुदायों की सामाजिक और कानूनी जरूरतों को देखते हुए इस विषय पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।

धार्मिक आजादी का मुद्दा उठाया

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में सभी नागरिकों और समुदायों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। उनके मुताबिक, मुस्लिम समुदाय का मानना है कि UCC से शरीयत से जुड़े व्यक्तिगत मामलों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कानून लागू किया जाता है तो मुस्लिम समुदाय पर उसे अपनी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ लागू करने का दबाव नहीं होना चाहिए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये मौलाना शहाबुद्दीन रजवी और उनके संगठन की ओर से रखे गए विचार हैं। UCC को लेकर देश में अलग-अलग राजनीतिक दलों, संगठनों और समुदायों के बीच अलग-अलग मत हैं।

विरोध प्रदर्शन को लेकर भी अपील

मौलाना ने देशभर के मुस्लिम संगठनों से संभावित विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने संगठनों से कहा कि प्रदर्शनकारियों को पहले से समझाया जाए कि विरोध के दौरान किसी तरह की हिंसा या उपद्रव न हो। सभी गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से और कानून के दायरे में रहकर की जाएं।

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UCC पर आगे भी जारी रह सकती है बहस

समान नागरिक संहिता का मुद्दा देश में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसके समर्थक देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नागरिक कानून की जरूरत बताते हैं, जबकि विरोध करने वाले संगठन धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाते हैं। बरेली से सामने आए इस बयान के बाद साफ है कि UCC को लेकर बहस सिर्फ कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक संरक्षण और अलग-अलग समुदायों की स्थानीय व्यवस्थाओं जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।

Location :  Bareilly

Published :  19 September 2026, 2:42 PM IST

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