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बाराबंकी जनपद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पार्टी के होर्डिंग हटाए जाने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना मसीहुर्रहमान मजाहिरी ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को शिकायती पत्र सौंपकर असामाजिक तत्वों पर जानबूझकर पार्टी के होर्डिंग हटाने का आरोप लगाया है।
AIMIM पार्टी के होर्डिंग हटाए जाने को लेकर विवाद
Barabanki: बाराबंकी जनपद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पार्टी के होर्डिंग हटाए जाने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना मसीहुर्रहमान मजाहिरी ने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को शिकायती पत्र सौंपकर असामाजिक तत्वों पर जानबूझकर पार्टी के होर्डिंग हटाने का आरोप लगाया है।
शिकायत पत्र में बताया गया है कि नववर्ष के अवसर पर AIMIM पार्टी की ओर से जनपद के विभिन्न स्थानों पर शुभकामना संदेश वाले होर्डिंग लगाए गए थे। यह होर्डिंग विधानसभा क्षेत्र कुर्सी संख्या 266 में पार्टी के जिला प्रभारी इमरान खान द्वारा लगवाए गए थे। आरोप है कि कुछ अराजक तत्वों ने दुर्भावनावश इन होर्डिंगों को हटाना शुरू कर दिया।
पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि इसी क्रम में AIMIM के एक कार्यकर्ता ने कुतुबुद्दीन पुत्र मुन्ना, निवासी ग्राम इसरौली, चौकी थाना फतेहपुर, जिला बाराबंकी को एक होर्डिंग तोड़कर साइकिल पर ले जाते हुए रंगे हाथ देखा। इस घटना के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है।
AIMIM जिला अध्यक्ष मौलाना मसीहुर्रहमान मजाहिरी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के जरिए पार्टी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण कृत्य बताया और कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का समान अधिकार है।
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मौलाना मसीहुर्रहमान मजाहिरी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
शिकायत दर्ज कराने के दौरान AIMIM पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष अरुण कुमार उर्फ विकास श्रीवास्तव, प्रदेश महासचिव खतीब अल्वी तथा जिला संगठन मंत्री इजहार अंसारी शामिल रहे।
पार्टी पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।