आखिर क्यों फूट पड़ा समूह सखियों का गुस्सा? कलेक्ट्रेट तक पहुंचा आंदोलन, दी बड़े फैसले की चेतावनी

बलरामपुर में समूह सखियों ने लंबित मानदेय, कम वेतन और सुविधाओं की कमी के विरोध में कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। महिलाओं ने समय पर भुगतान, मोबाइल-रिचार्ज सुविधा, 15,224 रुपये मासिक मानदेय और स्थायी नियुक्ति की मांग उठाई। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

Balrampur: बलरामपुर में ग्रामीण विकास कार्यों से जुड़ी समूह सखियों का लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जुटीं समूह सखियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की।

वर्षों से निभा रहीं अहम जिम्मेदारी

प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। गांवों में जागरूकता अभियान चलाने, डिजिटल कार्यों को पूरा करने, लाभार्थियों का डेटा तैयार करने और विभागीय कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने जैसी जिम्मेदारियां लगातार निभाई जा रही हैं।

महिलाओं का आरोप है कि इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इससे उनके सामने आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है।

मानदेय भुगतान में देरी बना बड़ी परेशानी

समूह सखियों ने बताया कि उनका मानदेय कई-कई महीनों तक लंबित रहता है। कई बार छह महीने से लेकर एक वर्ष तक भुगतान नहीं हो पाता और बाद में एकमुश्त राशि जारी की जाती है। इससे दैनिक जीवन और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा उन्हें लगातार फील्ड में काम करना पड़ता है, लेकिन यात्रा भत्ता नहीं मिलने के कारण जेब से खर्च करना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।

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प्रदर्शन में उठीं चार प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने चार मुख्य मांगों को प्रमुखता से उठाया। इनमें डिजिटल कार्यों के लिए मोबाइल फोन और मासिक रिचार्ज सुविधा उपलब्ध कराना, हर माह समय पर मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में करना, वर्तमान मानदेय में बढ़ोतरी कर कम से कम 15,224 रुपये प्रतिमाह देना और लंबे समय से कार्यरत समूह सखियों को स्थायी नियुक्ति प्रदान करना शामिल है।

महिलाओं का कहना है कि उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें भी सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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आंदोलन तेज करने की चेतावनी

समूह सखियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल आर्थिक हितों की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की भी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन में समूह सखियां महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाती हैं। यदि उनकी मांगों का समाधान होता है तो इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बल्कि ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और पहुंच भी अधिक मजबूत हो सकती है। इससे महिला सशक्तिकरण को भी नई गति मिलने की संभावना है।

Location :  Balrampur

Published :  18 June 2026, 2:17 PM IST

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