बलरामपुर का बदलता चेहरा: आस्था से उद्योग तक विकास की नई कहानी

शक्तिपीठ की धरती बलरामपुर अब आस्था के साथ-साथ विकास की नई पहचान गढ़ रहा है। देवीपाटन धाम में पचास करोड़ का भव्य कॉरिडोर आकार ले रहा है तो शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए बाईस किलोमीटर लंबा रिंग रोड बन रहा है।

Balrampur: कभी सिर्फ माँ पाटेश्वरी के जयकारों और राप्ती की लहरों से पहचाना जाने वाला बलरामपुर अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और उद्योग की तिहरी रफ्तार से दौड़ रहा है। मुख्यमंत्री का गृह-पीठ गोरक्षपीठ से सीधा जुड़ाव रखने वाले इस तराई जिले ने आस्था और आधुनिकता का ऐसा संगम रचा है कि इसे पूर्वांचल का नया ग्रोथ इंजन कहा जाने लगा है।

देवीपाटन धाम कॉरिडोर'

देश के 51 शक्तिपीठों में शुमार माँ देवीपाटन मंदिर, जहां माता सती का कंधा गिरा था, अब काशी विश्वनाथ और अयोध्या की तर्ज पर संवर रहा है। श्रद्धालुओं की सालाना 30 लाख से ज्यादा की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने 250 बीघा जमीन पर 50 करोड़ की लागत से 'देवीपाटन धाम कॉरिडोर' को मंजूरी दी है। परिक्रमा पथ, फैसिलिटी सेंटर और लाइट-एंड-साउंड शो के बाद यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बन जाएगा।

गोंडा, बहराइच और तुलसीपुर हाईवे

बलरामपुर शहर को जाम के दंश से निकालने के लिए 22 किलोमीटर लंबा आउटर रिंग रोड रिकॉर्ड समय में आकार ले रहा है। 515 करोड़ की यह परियोजना गोंडा, बहराइच और तुलसीपुर हाईवे को जोड़ेगी। साथ ही प्रस्तावित शामली-गोरखपुर-पानीपत सिक्स लेन एक्सप्रेसवे राप्ती के तटीय गांवों के लिए बाढ़ से सुरक्षा कवच और 'ग्रीन कॉरिडोर' दोनों का काम करेगा। रेलवे स्टेशन के बड़ी लाइन से जुड़ने के बाद अब दिल्ली-गोरखपुर रूट पर बलरामपुर सीधा स्टॉपेज बन गया है।

5 हजार छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा

जिले का पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार है। 500 बेड का यह अस्पताल नेपाल के कपिलवस्तु और दांग जिलों से आने वाले मरीजों के लिए भी लाइफलाइन बनेगा। दूसरी ओर, बलरामपुर विश्वविद्यालय का निर्माण अंतिम चरण में है। अगले सत्र से 5 हजार छात्र-छात्राओं को यहीं उच्च शिक्षा मिलेगी, जिन्हें पहले लखनऊ-गोरखपुर का रुख करना पड़ता था।

200 करोड़ का एक्सपोर्ट

ODOP में चुनी गई बलरामपुर की मसूर दाल अब लोकल मंडी की पहचान से निकलकर इंटरनेशनल ब्रांड बन चुकी है। आधुनिक दाल मिलों में प्रोसेस होकर 'रानी मसूर' और 'मलका मसूर' के नाम से यह कोलकाता, सिलीगुड़ी होते हुए बांग्लादेश तक पहुंच रही है। तराई की उपजाऊ मिट्टी में पैदा होने वाली इस दाल ने बीते साल 200 करोड़ का एक्सपोर्ट किया। जिला प्रशासन अब इसे जर्मनी और दुबई के फूड फेस्टिवल में ले जाने की तैयारी में है।

24,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स साइन

बेहतर कानून-व्यवस्था और कनेक्टिविटी के बाद इन्वेस्टर्स यूपी समिट में बलरामपुर के लिए 24,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स साइन हुए हैं। फूड प्रोसेसिंग, वेयरहाउसिंग और इको-टूरिज्म में बड़े समूह दिलचस्पी दिखा रहे हैं। डीएम कार्यालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से अगले 3 साल में 15 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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तुलसीपुर के किसान रामकिशोर वर्मा बताते हैं, पहले मसूर 4000 रुपये कुंतल बिकती थी, अब ब्रांडिंग के बाद 6200 मिल रहा है। वहीं देवीपाटन के पुजारी परिवार से जुड़े महंत मिथिलेश नाथ कहते हैं, "महाराज जी का विशेष स्नेह है। कॉरिडोर बनने से अयोध्या-श्रावस्ती-देवीपाटन सर्किट पूरा होगा।

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शक्तिपीठ की आध्यात्मिक ऊर्जा को विकास की धुरी बनाकर बलरामपुर ने साबित कर दिया है कि विरासत और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। नेपाल सीमा पर बसा यह जिला अब विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के रोडमैप का फ्रंटरनर बन चुका है।

Location :  Balrampur

Published :  24 April 2026, 3:41 PM IST

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